Himachal: ब्रेन की गंभीर बीमारी ने छीना डेढ़ साल की मासूम की आंखों का उजाला, परिवार को मदद की दरकार

Edited By Vijay, Updated: 15 Oct, 2026 05:40 PM

bilaspur 1 5 year old anika needs help for treatment

बिलासपुर जिले के झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत जबलू के गांव डाहड से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पंकज कश्यप और राधा देवी की डेढ़ साल की मासूम बेटी अनिका जन्म से ही एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है।

घुमारवीं (जम्वाल): बिलासपुर जिले के झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत जबलू के गांव डाहड से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पंकज कश्यप और राधा देवी की डेढ़ साल की मासूम बेटी अनिका जन्म से ही एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है। दिमागी बीमारी के कारण इस नन्ही-सी जान की आंखों की रोशनी तक चली गई है। परिवार की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पिता पंकज कश्यप जल शक्ति विभाग में आऊटसोर्स कर्मचारी हैं और उनकी मासिक आय मात्र 6000 रुपए है। ऐसे में अंधेरे से जूझ रही इस मासूम के इलाज का भारी-भरकम खर्च उठाना इस गरीब परिवार के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है।

बेंगलुरु से आता है 4000 रुपए का विशेष दूध
परिवार की आर्थिक पीड़ा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्ची का मासिक खर्च 12 से 15 हजार रुपए के बीच है। मासूम अनिका के लिए हर महीने बेंगलुरु से 4000 रुपए का विशेष दूध मंगवाना पड़ता है, इसके अलावा 8 से 10 हजार रुपए की जीवन रक्षक दवाइयां आती हैं। 6000 रुपए कमाने वाले पिता के लिए अपनी बेटी के इलाज लिए हर महीने 15 हजार रुपए का जुगाड़ करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

एम्स में चल रहा इलाज, नेताओं-प्रशासन से मिली नाममात्र की मदद
बच्ची का इलाज वर्तमान में एम्स बिलासपुर से चल रहा है, जिसके लिए परिवार को बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। परिवार आईआरडीपी श्रेणी से संबंध रखता है, इसके बावजूद उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिता का दर्द है कि उन्होंने अपनी बेटी की खातिर कई मंत्रियों और विधायकों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन प्रशासन की ओर से मात्र 10 हजार रुपए और नेताओं से नाममात्र की ही सहायता मिली। अब इस बेबस परिवार ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सीधे आर्थिक सहायता की मार्मिक गुहार लगाई है।

समाजसेवी विशाल चंदेल बने सहारा, जुटाई 1.42 लाख की मदद
सरकारी तंत्र और नेताओं की इस बेरुखी के बीच युवा समाजसेवी विशाल चंदेल ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। उन्होंने इस परिवार की पीड़ा को समझा और लोगों के सहयोग से 1 लाख 42 हजार रुपए की धनराशि एकत्रित कर पीड़ित परिवार को सौंपी। विशाल चंदेल ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल से इस दुखी परिवार की तुरंत सहायता करने का कड़ा अनुरोध किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह मामला सरकार के संज्ञान में आते ही संवेदनशीलता दिखाई जाएगी और मासूम को एक नई जिंदगी देने के लिए सरकार आगे आएगी।

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