Edited By Kuldeep, Updated: 03 Sep, 2026 09:48 PM

देवभूमि की सदियों पुरानी भाई-बहन की देव परंपरा का वीरवार को कांडीखल में भावुक और यादगार पल देखने को मिला।
बालीचौकी (फरेंद्र): देवभूमि की सदियों पुरानी भाई-बहन की देव परंपरा का वीरवार को कांडीखल में भावुक और यादगार पल देखने को मिला। साढ़े 3 दशक बाद आदिशक्ति माता अंबिका अपने भाई देव मार्कंडेय ऋषि के घर वीरवार को कांडीखल पहुंचीं। थाची के प्लाईधार से सैंकड़ों देवलुओं के साथ दोपहर बाद पहुंची माता अंबिका का यहां पहुंचते ही सबसे पहले देव मार्कंडेय ऋषि के साथ देव मिलन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उन्हें नमन किया। दोनों देवी-देवताओं के इस भावुक मिलन को देखने के लिए सैंकड़ों श्रद्धालु मौके पर मौजूद रहे। इसके बाद माता अंबिका ने अपने गूर के माध्यम से देववाणी में कहा कि जब संसार पर आपदा आने वाली होती है, तभी भाई-बहन एक साथ इकट्ठे होते हैं।
माता ने कहा कि आज जब इतने वर्षों बाद दोनों इस स्थान पर एक साथ इकट्ठे हुए हैं तो इसके पीछे क्या कारण है, इसका पता सभी को कुछ समय बाद चलेगा। इस देववाणी के बाद मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं में चर्चा का माहौल बन गया। इसके साथ ही माता अंबिका ने देववाणी के माध्यम से अपने क्षेत्रों सहित देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर अपना आशीर्वाद बनाए रखने की बात कही। देववाणी के दौरान बड़ी संख्या में देवलू और श्रद्धालु मौजूद रहे।
हारगी उत्सव से आगे बढ़ेगी देव परंपरा
देव मार्कंडेय ऋषि के पुजारी जीवन शर्मा, महेंद्र शर्मा और गूर जयदेव ने बताया कि कांडीखल में 2 दिवसीय मेले के दौरान देव मिलन के बाद हारगी उत्सव सहित विभिन्न देव कार्यवाहियां होंगी। ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नाटी और लोकनृत्य भी आयोजित किए जा रहे हैं। दोनों देवी-देवताओं के सान्निध्य में होने वाले आयोजन क्षेत्र की प्राचीन देव संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। शुक्रवार को भी हारगी उत्सव जारी रहेगा।