Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Jun, 2026 02:07 PM

Bilaspur News : हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले के सरकारी विद्यालयों में 'समग्र शिक्षा' योजना के तहत किए गए सामाजिक 'ऑडिट' (अंकेक्षण) में सामने आया है कि सर्वेक्षण में शामिल किसी भी स्कूल का भवन शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित बुनियादी...
Bilaspur News : हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले के सरकारी विद्यालयों में 'समग्र शिक्षा' योजना के तहत किए गए सामाजिक 'ऑडिट' (अंकेक्षण) में सामने आया है कि सर्वेक्षण में शामिल किसी भी स्कूल का भवन शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित बुनियादी ढांचे के मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता।
बुधवार को यहां जारी एक बयान के अनुसार, 'ऑडिट' के पहले चरण में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की एक टीम ने जिले के 154 सरकारी विद्यालयों का सर्वेक्षण किया। विश्वविद्यालय में ग्रामीण विकास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में किए गए इस सर्वेक्षण में जिले के कुल 809 सरकारी विद्यालयों में से लगभग 20 प्रतिशत विद्यालयों को शामिल किया गया। आगामी चार चरणों में शेष सभी स्कूलों का भी 'ऑडिट' किया जाएगा। ये निष्कर्ष मंगलवार को बिलासपुर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए जिसमें उपनिदेशक (शिक्षा गुणवत्ता) निशा गुप्ता भी मौजूद थीं। केंद्र प्रायोजित 'समग्र शिक्षा' योजना की शुरुआत 2018 में पूर्व-प्राथमिक से लेकर कक्षा 12 तक की स्कूली शिक्षा में सुधार के उद्देश्य से की गई थी।
बयान के अनुसार, 'ऑडिट' में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे, छात्रों की सुरक्षा, पहुंच, प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं। इन कमियों ने आरटीई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, किसी भी स्कूल में पेशेवर परामर्श सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। 'ऑडिट' टीम के सदस्य बच्चन सिंह ने कहा, "बिलासपुर के आधे से अधिक विद्यालयों में चारदीवारी या बाड़ नहीं है, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा होते हैं, विशेषकर छात्राओं के लिए।" उपनिदेशक निशा गुप्ता ने कहा, "बिलासपुर जिले ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन रिपोर्ट में कुछ कमियां भी उजागर हुई हैं, जिन्हें निकट भविष्य में दूर कर लिया जाएगा।"
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