Edited By Kuldeep, Updated: 20 Aug, 2026 09:45 PM

हिमाचल में तबाही मचाने वाले मानसून से अब लोगों को थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। लगातार बारिश के बाद 23 अगस्त से प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है।
शिमला (संतोष): हिमाचल में तबाही मचाने वाले मानसून से अब लोगों को थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। लगातार बारिश के बाद 23 अगस्त से प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। हालांकि, अगस्त महीने में अब तक प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 8 फीसदी कम रहा है, लेकिन हालिया बारिश ने बुनियादी ढांचे को नुक्सान पहुंचाया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आने वाले दिनों के लिए मौसम का मिजाज धीमा रहेगा। 21 और 22 अगस्त को राज्य में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। 23 अगस्त को राज्य में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है। 21 से 27 अगस्त के पहले सप्ताह के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। 28 अगस्त से 3 सितम्बर के दूसरे सप्ताह में भी अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से नीचे रहेगी, लेकिन चम्बा और लाहौल-स्पीति जिलों के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य रह सकती है। वीरवार को राजधानी शिमला सहित कुछ इलाकों में हल्की वर्षा हुई है।
लगातार हुई बारिश और भूस्खलन ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य में भूस्खलन के कारण मंडी-कोटली नैशनल हाईवे-003 सहित 135 सड़कें पूरी तरह से बंद हैं। सड़कों के अवरुद्ध होने की सबसे बड़ी समस्या मंडी जिला में है, जहां 53 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 43 और चंबा में 10 सड़कें प्रभावित हैं। पूरे प्रदेश में सुबह 80 बिजली ट्रांसफार्मर ठप्प थे, लेकिन शाम तक इनकी संख्या 22 रह गई। सुबह 116 पेयजल परियोजनाएं बंद थीं, जो शाम को घटकर 79 रह गईं।
इस साल का मानसून प्रदेश के लिए काफी विनाशकारी साबित हुआ है। 30 जून से अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 219 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 330 लोग घायल हैं और तीन लापता हैं। बारिश और भूस्खलन के कारण 86 मकान, 15 दुकानें और 312 गऊशालाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। राज्य को अब तक 1108 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुक्सान हो चुका है। इसमें सबसे ज्यादा 825 करोड़ रुपए का नुक्सान लोनिवि को हुआ है और जल शक्ति विभाग को 258 करोड़ का नुक्सान झेलना पड़ा है। मानसून के कमजोर पड़ने से अब प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और बहाली में तेजी लाने की उम्मीद है।