Edited By Kuldeep, Updated: 11 Aug, 2026 07:41 PM

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा निदेशालय ने अनुबंध आधार पर नियुक्त टीजीटी शिक्षकों को अनुबंध अवधि के दौरान 1 जनवरी 2016 से नियमितीकरण तक संशोधित वेतनमान के न्यूनतम वेतन का 60 प्रतिशत देने की अनुमति प्रदान की है।
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा निदेशालय ने अनुबंध आधार पर नियुक्त टीजीटी शिक्षकों को अनुबंध अवधि के दौरान 1 जनवरी 2016 से नियमितीकरण तक संशोधित वेतनमान के न्यूनतम वेतन का 60 प्रतिशत देने की अनुमति प्रदान की है। यह लाभ प्रदेश सरकार की ओर से दायर एलपीए के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। मामला न्यायालय में टीजीटी शिक्षकों की सिविल रिट याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाकर्त्ताओं ने अपनी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से संशोधित पारिश्रमिक का लाभ देने की मांग की थी। रिकॉर्ड के अनुसार इन शिक्षकों की टीजीटी के पद पर अनुबंध आधार पर नियुक्तियां 2014 से 2021 के बीच हुई थीं, जबकि अलग-अलग मामलों में उनका नियमितीकरण 2017 से 2022 के बीच हुआ। शिक्षकों ने 12 जनवरी 2022 की सरकारी अधिसूचना के आधार पर संशोधित पारिश्रमिक देने की मांग की थी।
शिक्षा निदेशालय के निर्देश के अनुसार संबंधित टीजीटी शिक्षकों का अनुबंध अवधि का वेतन संशोधित वेतनमान के न्यूनतम 38,100 रुपए के 60 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। इसके साथ संशोधित अधिसूचना के तहत पात्र अन्य बढ़ौतरी का लाभ भी दिया जाएगा। यह गणना 1 जनवरी 2016 से संबंधित शिक्षक के नियमितीकरण की तिथि तक की जाएगी। संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पात्र टीजीटी शिक्षकों का अनुबंध अवधि का वेतन नए प्रावधान के अनुसार निर्धारित करें, साथ ही यह लाभ प्रदेश सरकार की ओर से दायर एलपीए के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।
यदि भविष्य में एलपीए का फैसला विभाग के पक्ष में आता है, तो संबंधित शिक्षकों को प्राप्त अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। इसके लिए शिक्षकों से अंडरटेकिंग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि बाद में अधिक भुगतान पाए जाने पर राशि की वसूली की जा सके। निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी याचिकाकर्त्ता को पहले ही इस अवधि का लाभ दिया जा चुका है, तो उसे दोहरा लाभ न दिया जाए। संबंधित लाभ की प्रविष्टि शिक्षकों की सर्विस बुक में भी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।