Shimla: शिक्षकों का पदोन्नति को लेकर सरकार को अल्टीमेटम

Edited By Kuldeep, Updated: 13 Apr, 2026 05:31 PM

shimla teachers promotion government ultimatum

हिमाचल प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है।

शिमला (प्रीति): हिमाचल प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। संयुक्त कार्यवाही समिति ने एक प्रैस वार्ता के माध्यम से स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पदोन्नति और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया तो शिक्षक कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। समिति के अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने कहा कि शिक्षकों के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण यूजीसी के 7वें वेतनमान को लागू करने के दौरान लगाई गईं शर्तें हैं। प्रदेश सरकार ने वेतन आयोग तो लागू किया लेकिन इसमें धारा संख्या 4 और 5 जोड़ दी। इन धाराओं के तहत पदोन्नति के लिए अलग से नियम बनाने की बात कही गई थी, जो साढ़े 3 साल बीत जाने के बाद भी नहीं बने। इसके चलते प्रदेश के 40 से 50 प्रतिशत शिक्षकों की प्रमोशन रुकी है।

प्रोफैसर जनार्दन सिंह के अनुसार स्थिति इतनी भयावह है कि कई शिक्षक असिस्टैंट प्रोफैसर के पद पर भर्ती हुए और उसी पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं, लेकिन इस पर अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में रुकी प्रमोशन के कारण शिक्षक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। इसमें बजट की कमी नहीं, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली संयुक्त कार्यवाही समिति के महासचिव डा. नितिन व्यास ने कहा कि इतिहास में पहली बार शिक्षकों को वेतन मिलने में देरी हो रही है। समिति का आरोप है कि इसमें बजट की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली इसके पीछे है। उन्होंने कहा कि शिक्षक पहले अलग-अलग लड़ रहे थे, लेकिन अब संयुक्त कार्यवाही समिति के बैनर तले एकजुट हो चुके हैं।​

महासचिव डा. नितिन व्यास ने कहा कि इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वह मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा करेंगे।​ शिक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री स्वयं इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं, अतः वह उनकी पीड़ा समझेंगे, बशर्ते अधिकारी उनके समक्ष सही तथ्य प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि एक शिष्टमंडल पुनः मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेगा। यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो शिक्षक मजबूरन कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे। इस दौरान शैक्षणिक कार्य को भी प्रभावित किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि वह सीएएस को तुरंत बहाल कर शिक्षकों के गतिरोध को समाप्त करे।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!