Edited By Kuldeep, Updated: 30 Sep, 2026 10:30 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण की समय-सीमा बढ़ाए जाने की मनमानी प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण की समय-सीमा बढ़ाए जाने की मनमानी प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार बिना किसी ठोस लिखित कारण के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना को बार-बार नहीं बढ़ा सकती। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर व अन्य द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार की अधिसूचनाओं को अवैध करार देकर रद्द कर दिया है।
यह मामला बिलासपुर जिले के सदर तहसील के तहत आने वाले गांवों—उपरी भटेर, बरमाना और खतेर से जुड़ा है। इन गांवों के किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और मकानों को भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के निर्माण के लिए अधिगृहीत किया जा रहा था। सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 29 मार्च 2023 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। कानून के अनुसार, इसके 12 महीने के भीतर अंतिम घोषणा होनी अनिवार्य थी। अंतिम घोषणा करने में नाकाम रही सरकार ने तीन बार (16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026) इसकी समय-सीमा बढ़ा दी। अधिसूचनाओं में देरी का कारण केवल "अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थितियां" बताया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर जब अदालत में सरकारी फाइलें पेश की गईं तो सरकार ने यह स्वीकार किया कि फाइलों में भी देरी का कोई वास्तविक कारण या ब्यौरा दर्ज नहीं था।
अदालत ने अधिनियम की धारा 19(7) के तीसरे प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि समय-सीमा बढ़ाने के फैसले के पीछे के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना, अधिसूचित करना और संबंधित विभाग की वैबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य नियम है। कोर्ट ने कहा कि कारण बताए बिना केवल 'प्रशासनिक परिस्थितियों' का हवाला देना एक बहाना मात्र है और इसे कानूनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार की इस लापरवाही के कारण किसान अपनी ही जमीन पर कोई नया विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। अदालत ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 29 मार्च 2023 की प्रारंभिक अधिसूचना और समय बढ़ाने वाली तीनों अधिसूचनाओं को कानूनन गलत ठहराते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया है।