Shimla: प्रदेश में बजट पर चर्चा शुरू, वर्तमान सरकार जहां से चली वहीं पहुंच गई, बजट में 6.13 प्रतिशत की गिरावट : जयराम

Edited By Kuldeep, Updated: 23 Mar, 2026 10:12 PM

shimla budget discussion begins

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों पर चर्चा शुरू की गई। इस दौरान पक्ष व विपक्ष के बीच नोक-झोंक चलती रही तथा एक-दूसरे पर वह तल्ख टिप्पणी करते रहे।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों पर चर्चा शुरू की गई। इस दौरान पक्ष व विपक्ष के बीच नोक-झोंक चलती रही तथा एक-दूसरे पर वह तल्ख टिप्पणी करते रहे। चर्चा शुरू करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सीएम द्वारा प्रस्तुत बजट पर कहा कि वर्तमान सरकार जहां से चली थी, वहीं पहुंच गई है। वर्ष 2023 में बजट 53,412 करोड़ रुपए का था, वर्ष 2025 में 58,515 करोड़ का तथा वर्ष 2026-27 में बजट 54,992 करोड़ रह गया है। हिमाचल के इतिहास में पहली बार प्रस्तुत बजट पिछली बार की तुलना में कम प्रस्तुत हुआ है। यदि पिछले वर्ष के समान ही बजट रहता तो भी ठीक रहता। पिछले बजट वर्ष की अपेक्षा अधिकांश क्षेत्रों के बजट को कम किया है। मुख्य क्षेत्रों में बजट 42 प्रतिशत कम हुआ है। इस तरह से प्रदेश का कैसे भला होगा। ऐसे में प्रस्तुत बजट फिर वह ही ढाक के तीन पात जैसा है।

उन्होंने कहा कि सीएम द्वारा प्रस्तुत बजट इतिहास का लंबा बजट हो सकता है, लेकिन इसमें गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं तथा सच्चाई को छुपाने का प्रयास किया है। इससे प्रदेश 10 वर्ष पीछे चला गया है। बजट में विकास कार्यों के लिए 100 रुपए में से 20 रुपए रखे गए हैं। बजट में 6.13 प्रतिशत की गिरावट हुई है। पूरे देश में हिमाचल एक मात्र राज्य है, जिसका बजट आगे की तरफ नहीं पीछे की तरफ जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने ओपीएस का विरोध नहीं किया है लेकिन इसका बोझ 2027 के बाद पड़ेगा, इसको लेकर रास्ता निकाला जाए। सरकार ने बिना फंडिंग के योजनाओं की घोषणा की है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार लगातार केंद्र सरकार को कोसती रहती है लेकिन आर.डी.जी. बंद होने के बाद भी केंद्र के सहयोग में कोई खास कमी नहीं आई है। अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में 7300 करोड़ रुपए की मदद अलग से की है।

ऑफ बजट बॉरोइंग की प्रथा की शुरू
जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने ऑफ बजट बॉरोइंग की प्रथा शुरू की है। वर्ष 94 से 99 में बिजली बोर्ड से कर्जा लिया था तथा अब वर्तमान सरकार ने हुडको से 3 हजार करोड़ का कर्जा लिया, जिसे बांट भी दिया गया है। यदि इसे भी कर्जे में मिला लें, तो कर्जा 1 लाख 11 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा। वित्त सचिव कह रहे हैं कि सबसिडी बंद करनी पड़ेगी, लेकिन यहां पर अति गरीब परिवार को 300 यूनिट देने की बात कर रहे हैं, जबकि बजट 50 प्रतिशत से भी कम कर दिया है।

नहीं हो सकता अमीर राज्य
उन्होंने कहा कि एक तरफ सीएम कहते हैं कि हम 2027 तक आत्मनिर्भर व 2032 तक हिमाचल सबसे अमीर राज्य बन जाएगा, लेकिन फिर कहते हैं कि रैवेन्यू सरप्लस नहीं हो सकते हैं। इसका मतलब है कि हम आत्मनिर्भर नहीं हो सकते हैं। यदि आने वाले समय में देश के सबसे अमीर राज्य नहीं हो सकते हैं।

 

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