Shimla: गरीब की पर्ची के लिए 10 रुपए भी नहीं, मुख्यमंत्री-मंत्रियों के आलीशान दफ्तरों पर करोड़ों का खर्च : बिंदल

Edited By Kuldeep, Updated: 23 Sep, 2026 05:47 PM

shimla bindal government comment

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आल्टो कार से शुरू हुआ सफर अब आलीशान गाड़ियों, करोड़ों रुपए के दफ्तरों और कोठियों तक पहुंच चुका है।

शिमला (ब्यूरो): भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आल्टो कार से शुरू हुआ सफर अब आलीशान गाड़ियों, करोड़ों रुपए के दफ्तरों और कोठियों तक पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अस्पतालों में मरीज की पर्ची देने के लिए 10 रुपए तक नहीं हैं। इसके विपरीत सरकार प्रदेश की जनता पर कर्ज, टैक्स और महंगाई का बोझ लगातार बढ़ा रही है। यही कांग्रेस सरकार के तथाकथित व्यवस्था परिवर्तन की वास्तविक तस्वीर है। डा. राजीव बिंदल ने शिमला से जारी बयान में आरोप लगाया कि आम आदमी को मिलने वाली राहतों में लगातार कटौती की जा रही है। बिजली सबसिडी में बदलाव किया गया, बिजली पर विभिन्न सैस लगाए गए, स्टाम्प ड्यूटी और एचआरटीसी से जुड़ी रियायतों में बदलाव हुआ, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों के लिए महंगे और सुविधाओं से लैस कार्यालयों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हिमकेयर के तहत उपचार को लेकर लोगों और अस्पतालों की समस्याएं सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने में पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पैंशनर्स अपनी देनदारियों और समय पर पैंशन के लिए आवाज उठा रहे हैं। बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कांग्रेस द्वारा चुनाव से पहले किया गया एक लाख सरकारी नौकरियों का वायदा आज युवाओं के लिए छलावा बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की महिलाएं अपने चुनावी वायदों की ओर सरकार काे ध्यान दिला रही हैं, जबकि आम परिवार बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बढ़ते खर्च से परेशान हैं। स्कूलों को बंद और मर्ज करने के फैसलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ आलीशान कार्यालयों के उद्घाटन किए जा रहे हैं और दूसरी तरफ जनता की सेवा तथा विकास कार्यों के लिए स्थापित सरकारी कार्यालयों को बंद या पुनर्गठित किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में नैशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और 8 सबडिवीजन बंद करने की अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने कहा कि ये कार्यालय सड़क निर्माण, मुरम्मत और क्षेत्रीय विकास कार्यों के लिए बनाए गए थे। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन्हें बंद करने से संबंधित क्षेत्रों की जनता और सड़क परियोजनाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी चाहिए। सरकारी संसाधनों का पहला अधिकार प्रदेश की जनता, गरीब, किसान, कर्मचारी, पैंशनर, महिला और बेरोजगार युवा का होना चाहिए, न कि सत्ता में बैठे लोगों की सुविधाओं का। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों और खर्च का राजनीतिक हिसाब जनता स्वयं करेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में अपना फैसला देगी।

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