Edited By Kuldeep, Updated: 16 Aug, 2026 11:02 PM

फर्जी फोन कॉल या मैसेज ही नहीं, अब ठगी के लिए आपकी अपनी आवाज और चेहरा ही आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है।
शिमला (राक्टा): फर्जी फोन कॉल या मैसेज ही नहीं, अब ठगी के लिए आपकी अपनी आवाज और चेहरा ही आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और डीपफेक तकनीक के दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीकों को पहले से कहीं अधिक हाईटैक और खतरनाक बना दिया है। महज कुछ सैकेंड के ऑडियो या एक फोटो के आधार पर बनाई जा रही नकली सामग्री के जरिए ठग लोगों का भरोसा जीतकर उनको अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश पुलिस विभिन्न माध्यमों से आम जनता को साइबर ठगों के नए डिजिटल हथियारों को लेकर जागरूक कर रही है।
सामने आया है कि लोगों को अपने जाल में फंसाने की शुरूआत सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से पीड़ित की निजी जानकारी जुटाने से होती है। इसके बाद अपराधी बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, रिश्तेदार या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर संपर्क साधते हैं। बातचीत के दौरान शिकार के मन में डर या लालच पैदा किया जाता है, ताकि वह बिना सोचे-समझे तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दें। पुलिस के अनुसार एआई वॉयस क्लोनिंग तकनीक के चलते किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना बेहद आसान हो चुका है। ठग आपात स्थिति का बहाना बनाकर परिवार के किसी सदस्य की आवाज में फोन करते हैं और पैसों की मांग करते हैं।
वहीं, डीपफेक वीडियो के जरिए किसी परिचित या नामचीन हस्ती का नकली वीडियो बनाकर लोगों को फर्जी निवेश या योजनाओं में फंसाया जा रहा है। साइबर ठग ऐसा जाल बनुते हैं कि बैंक, सरकारी विभाग या कूरियर कंपनियों के नाम पर भेजे गए फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही यूजर एक नकली वैबसाइट पर पहुंच जाता है। वहां लॉगिन डिटेल्स, कार्ड नंबर और ओटीपी दर्ज कराते ही खाता खाली कर दिया जाता है। इसके अलावा, फर्जी ट्रेडिंग एप पर शुरूआती छोटे मुनाफे का लालच देकर बाद में बड़ी रकम हड़प ली जाती है।
सतर्कता सबसे बड़ा हथियार
प्रदेश पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि डिजिटल ठगी से बचने के लिए सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपना ओ.टी.पी. या यूपीआई पीन किसी के साथ सांझा करें। यदि कोई परिचित फोन पर अचानक पैसों की मांग करे, तो केवल आवाज सुनकर भरोसा न करें, दूसरे माध्यम या किसी अन्य नंबर से कॉल करके पहचान की पुष्टि जरूर करें। पुलिस के अनुसार किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत हैल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।