Edited By Swati Sharma, Updated: 31 Aug, 2026 10:38 AM

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। महामारी विशेषज्ञ डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि यह केवल मौसमी इन्फ्लूएंजा का असर है और कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने...
Hamirpur News : हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। महामारी विशेषज्ञ डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि यह केवल मौसमी इन्फ्लूएंजा का असर है और कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं न लेने की सख्त चेतावनी दी है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पत्रकारों से बात करते हुए महामारी विशेषज्ञ डॉ. पुरोहित ने बताया कि स्वाइन फ्लू (एच1एन1) इन्फ्लूएंजा ए वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर एवं सिर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में, विशेषकर संवेदनशील समूहों के लिए यह गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। आईसीएमआर के प्रमाणित शोध विद्वान डॉ. पुरोहित ने जोर देकर कहा कि एच1एन1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं आया है और यह वृद्धि केवल मौसमी इन्फ्लूएंजा को दर्शाती है। चिकित्सक ने बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल दवा न लेने की चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक्स इन्फ्लूएंजा के खिलाफ काम नहीं करती हैं, जो वायरल संक्रमण है और इसका गलत इस्तेमाल बड़े खतरे को जन्म देता है।
नरेश पुरोहित ने कहा, 'बुखार, खांसी या शरीर में दर्द का पहला लक्षण दिखते ही अक्सर लोग या चिकित्सक एंटीबायोटिक्स की ओर रुख करते हैं। इस तरह का अंधाधुंध उपयोग न केवल हानिकारक है, बल्कि यह रोगाणुरोधी प्रतिरोध को भी बढ़ावा देता है, जिससे जीवाणु संक्रमण के खिलाफ दवाओं की प्रभावशीलता कम हो जाती है।' इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब द्वितीयक जीवाणु संक्रमण के कारण फ्लू जटिल हो जाता है, तब एंटीबायोटिक्स आवश्यक हो सकती हैं, लेकिन इसका निर्णय किसी योग्य डॉक्टर का होना चाहिए, न कि किसी मेडिकल स्टोर के काउंटर या गूगल सर्च का।
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