Edited By Kuldeep, Updated: 15 Apr, 2026 11:16 PM

एक तरफ जहां सरकार पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और नई-नई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार सरकारी विभाग ही इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
रक्कड़ (आनंद): एक तरफ जहां सरकार पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और नई-नई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार सरकारी विभाग ही इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ताजा मामला श्री कालेश्वर महादेव में आयोजित बैसाखी मेले का है, जहां बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मेले में अस्थायी बिजली व्यवस्था के लिए विभाग ने लोहे के खंभों की बजाय पेड़ों का सहारा लिया है। पेड़ों के तनों में बड़ी-बड़ी कीलें ठोककर लकड़ी के बोर्ड और बिजली के मीटर टांग दिए गए हैं।
विभाग की यह हरकत न केवल पेड़ों के अस्तित्व के लिए खतरा है, बल्कि मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इस पर गहरी चिंता जताई है। इस लापरवाही से निम्नलिखित खतरे पैदा हो सकते हैं। शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में सूखे पत्तों और टहनियों के कारण भीषण आग लग सकती है।
उठ रहे हैं सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या बिजली विभाग के पास अस्थायी खंभों की कमी है? क्या विभाग को नियमों की जानकारी नहीं है? लोगों ने मांग की है कि पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाने वाली इस व्यवस्था को तुरंत बदला जाए