Edited By Vijay, Updated: 01 Apr, 2026 01:39 PM

देशभर में खाली और बंजर पड़े जंगलों को फिर से हरा-भरा करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इस काम में अब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए सरकार ने ग्रीन क्रैडिट प्रोग्राम की शुरूआत की है।
धर्मशाला: देशभर में खाली और बंजर पड़े जंगलों को फिर से हरा-भरा करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इस काम में अब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए सरकार ने ग्रीन क्रैडिट प्रोग्राम की शुरूआत की है। यह जानकारी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में दी। वे हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद इंदु बाला गोस्वामी द्वारा सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
राज्य का वन विभाग करेगा भूमि का चयन
केंद्रीय राज्य मंत्री ने सांसद इंदु गोस्वामी को बताया कि ग्रीन क्रैडिट प्रोग्राम के तहत किस बंजर वन भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा, इसका फैसला राज्य सरकार का वन विभाग करेगा। वन विभाग मौके की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही भूमि का चयन करेगा, ताकि वहां सफल पौधरोपण किया जा सके।
क्रैडिट के लिए 5 साल का इंतजार और 40 फीसदी हरियाली की शर्त
इस योजना के तहत नियम बेहद सख्त और स्पष्ट रखे गए हैं। मंत्री ने बताया कि कोई भी संस्था (अभ्यर्थी) बंजर भूमि पर पौधरोपण करने के तुरंत बाद ग्रीन क्रैडिट का दावा नहीं कर सकती। इसके लिए पौधरोपण और हरियाली विकसित करने के 5 साल बाद ही क्लेम किया जा सकेगा। सरकार ने यह 5 साल की अवधि इसलिए तय की है ताकि उस क्षेत्र में हरियाली की एक स्थायी परत विकसित हो सके। इसके अलावा, ग्रीन क्रैडिट का क्लेम तभी मान्य होगा जब उस बंजर क्षेत्र में वनों की परत कम से कम 40 प्रतिशत तक पहुंच जाए और वह इलाका पूरी तरह से हरे-भरे पेड़ों से कवर हो जाए।
जैव विविधता बढ़ाना है मुख्य उद्देश्य
कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि बंजर वनों को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किए गए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में जैव विविधता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, इससे वन संसाधनों की पर्यावरणीय सेहत में सुधार होगा और उनकी उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी।
देहरादून आईसीएफआरई को मिली प्रशासक की जिम्मेदारी
इस पूरे ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए देहरादून स्थित भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) को इस कार्यक्रम का प्रशासक नियुक्त किया गया है। यही संस्था इस योजना की निगरानी और क्रैडिट देने की प्रक्रिया का संचालन करेगी।
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