Edited By Vijay, Updated: 16 May, 2026 01:16 PM

हिमाचल प्रदेश के सराज विधानसभा क्षेत्र से लोकतंत्र की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। यहां की ग्राम पंचायत गुढार और अनाह के ग्रामीणों ने आपसी सहमति जताते हुए सर्वसम्मति से अपनी पंचायतों का निर्विरोध गठन किया है।
मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश के सराज विधानसभा क्षेत्र से लोकतंत्र की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। यहां की ग्राम पंचायत गुढार और अनाह के ग्रामीणों ने आपसी सहमति जताते हुए सर्वसम्मति से अपनी पंचायतों का निर्विरोध गठन किया है। चुनाव की लंबी और खींचतान भरी प्रक्रिया से दूर, भाईचारे से चुनी गई इन नई पंचायतों के गठन पर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद शनिवार को नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से मुलाकात की। नेता प्रतिपक्ष ने इस सराहनीय कार्य के लिए सभी को बधाई दी और उनके इस कदम की जमकर प्रशंसा की। इस अनूठी पहल के लिए दोनों पंचायतों के निवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों को चारों ओर से शुभकामनाएं मिल रही हैं।
गुटबाजी छोड़ ग्रामीणों ने पेश की परिपक्वता की मिसाल
आज के दौर में जहां पंचायत चुनाव अक्सर गुटबाजी और आपसी मतभेदों का कारण बन जाते हैं, वहीं सराज के गुढार और अनाह के ग्रामीणों ने पूरे प्रदेश को एक नई राह दिखाई है। दोनों पंचायतों के प्रबुद्ध नागरिकों, बुजुर्गों और युवाओं ने गजब की राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देते हुए व्यक्तिगत रंजिशों को किनारे रखा और गांव के विकास को सर्वोपरि माना। एकमत होकर अपना नेतृत्व चुनना यह साबित करता है कि विकास की मजबूत नींव केवल एकता के बल पर ही रखी जा सकती है। यह पहल न केवल सराज विधानसभा, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।
निर्विरोध चुनाव से होंगे ये बड़े फायदे, फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक
ग्रामीणों का मानना है कि निर्विरोध पंचायत के गठन से गांव और समाज को कई बड़े फायदे होंगे। निर्विरोध चुनाव से चुनाव प्रचार में होने वाले भारी-भरकम फिजूलखर्च और समय की बर्बादी रुकी है। अब यह पैसा और ऊर्जा सीधे गांव के विकास में लगाई जाएगी। पंचायतें अब राजनीतिक बंधनों से मुक्त होकर काम करेंगी। इससे बिना किसी भेदभाव के हर वार्ड और हर घर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकेंगी। गांव के पारंपरिक भाईचारे को मजबूती मिलेगी, जिससे भविष्य में भी गांव के बड़े फैसले आपसी सहमति से आसानी से लिए जा सकेंगे। कोई चुनावी रंजिश न होने के कारण नवनिर्वाचित प्रतिनिधि अपनी पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी मानसिक तनाव के जनता की समस्याओं के निवारण में जुट सकेंगे।
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