Edited By Vijay, Updated: 24 Oct, 2026 07:25 PM

विश्व प्रसिद्ध कुल्लू अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव के चौथे दिन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उत्सव के मुख्य आकर्षणों में शामिल भगवान नरसिंह की तीसरी शाही जलेब पूरे पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई।
कुल्लू (धनी राम): विश्व प्रसिद्ध कुल्लू अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव के चौथे दिन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उत्सव के मुख्य आकर्षणों में शामिल भगवान नरसिंह की तीसरी शाही जलेब पूरे पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई। इस अवसर पर देव संस्कृति के दर्शन करने के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मुख्य छड़ीबरदार की अगुवाई में निकली शोभायात्रा
आयोजन के दौरान भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए। दोपहर करीब 4 बजे राजा की चानणी के पास जलेब की तैयारियां पूरी की गईं। जैसे ही जलेब का शुभारंभ हुआ, सैंज घाटी के विभिन्न देवी-देवताओं के साथ उनके देवलू ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए आगे बढ़े। शोभायात्रा में भगवान नरसिंह की घोड़ी सबसे आगे चल रही थी, जिसके पीछे भव्य लाव-लश्कर मौजूद था।
इन मार्गों से गुजरी शाही जलेब
यह शाही शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए निकली, जिसमें अस्पताल सड़क, कॉलेज गेट के पीछे स्थित पुराना स्टेट पार्क, बीडीओ ऑफिस, रथ मैदान और एसपी कार्यालय शामिल रहे। पूरे मार्ग के दौरान श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के जयघोष किए। अंत में, यह जलेब वापस राजा की चानणी के पास पहुंचकर संपन्न हुई।
इन देवी-देवताओं ने बढ़ाई शोभा
दशहरा उत्सव की इस तीसरी जलेब में सैंज घाटी के प्रमुख देवी-देवताओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें मुख्य रूप से शैंशर व रैला के देवता रिंगू नाग, आशापुरी, मनु ऋषि, लक्ष्मीनारायण रैला और भलाण लक्ष्मी नारायण सहित अन्य देवी-देवता शामिल रहे। इन देवी-देवताओं का आगमन उत्सव में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा था, जिसे देखने के लिए लोग सड़क के दोनों ओर कतारों में खड़े नजर आए।
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