दूसरी शादी करने वाले पति को कोर्ट से झटका, गुजारा भत्ता नए सिरे से होगा तय

Edited By Swati Sharma, Updated: 02 Oct, 2026 01:56 PM

husband who married for the second time gets a shock from the court

Bilaspur News : पत्नी और बेटियों को छोड़कर दूसरी शादी करने तथा घरेलू हिंसा के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पति द्वारा दूसरी शादी करने और उससे बच्चे होने को पत्नी के प्रति...

Bilaspur News : पत्नी और बेटियों को छोड़कर दूसरी शादी करने तथा घरेलू हिंसा के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पति द्वारा दूसरी शादी करने और उससे बच्चे होने को पत्नी के प्रति मानसिक क्रूरता माना है। अदालत ने घरेलू हिंसा का निष्कर्ष बरकरार रखते हुए निचली अदालत के 5 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने के आदेश को रद्द कर दिया।

हालांकि, यह राहत पति को गुजारा भत्ता देने से मुक्त करने के रूप में नहीं है। अदालत ने केवल भत्ते की राशि का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए मामला निचली अदालत को वापस भेजा है। मामले के अनुसार, घुमारवीं क्षेत्र के बरोटा (घाट) निवासी रेशमू देवी उर्फ रोशनी देवी ने पति ईश्वर दास उर्फ ईश्वर सिंह के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत याचिका दायर की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि उसका पति जिला परिषद मोहाली में चपड़ासी के पद पर कार्यरत है और करीब 35 हजार रुपए मासिक वेतन प्राप्त करता है। आरोप था कि पति ने उसे और बेटियों को छोड़ दिया तथा मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इसके अलावा उसने चंडीगढ़ निवासी एक महिला से दूसरी शादी कर ली। उसकी 2 बेटियां हैं। अदालत ने माना कि पति द्वारा दूसरी शादी करना और उससे बच्चे होना पत्नी के लिए गंभीर मानसिक क्रूरता है और यह घरेलू हिंसा के दायरे में आता है। निचली अदालत ने 28 सितम्बर 2023 को पत्नी को 5 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था।

अपील की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले में दिए दिशा-निर्देशों के अनुसार दोनों पक्षों की आय, संपत्ति और देनदारियों के शपथ पत्र रिकॉर्ड पर नहीं लिए गए थे। इसी कारण गुजारा भत्ते की राशि के आदेश को रद्द कर मामले को दोबारा निचली अदालत भेजा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा का तथ्य सिद्ध हो चुका है। अब दोनों पक्षों के शपथ पत्र लेकर गुजारा भत्ते की उचित राशि तय की जाएगी।

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