कुल्लू में ऐतिहासिक काहिका उत्सव संपन्न, लराईं महादेव ने ब्यास-पार्वती के संगम पर किया पवित्र स्नान

Edited By Vijay, Updated: 28 Aug, 2026 06:38 PM

historical kahika festival concludes in kullu

देवभूमि कुल्लू की प्राचीन देव परंपराएं और मान्यताएं आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवंत हैं। इसी अटूट आस्था का अद्भुत नजारा तब देखने को मिला, जब ऐतिहासिक काहिका उत्सव के समापन के बाद लराईं महादेव ने जिया संगम में पवित्र स्नान किया।

रायसन (चेतन): देवभूमि कुल्लू की प्राचीन देव परंपराएं और मान्यताएं आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवंत हैं। इसी अटूट आस्था का अद्भुत नजारा तब देखने को मिला, जब ऐतिहासिक काहिका उत्सव के समापन के बाद लराईं महादेव ने जिया संगम में पवित्र स्नान किया। ब्यास और पार्वती नदी के इस पावन संगम पर महादेव के स्नान के साथ ही 3 साल में एक बार होने वाले इस उत्सव का विधिवत समापन हो गया।

कुल्लू की देव परंपरा के अनुसार लराईं महादेव के दरबार में हर तीन साल के अंतराल पर काहिका उत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। यह उत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही देव संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्सव के सभी अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद महादेव को जिया संगम लाया जाता है, जहां उन्हें देव रीति-रिवाजों के साथ पवित्र स्नान करवाया जाता है। देव समाज में इस स्नान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।

शुक्रवार को लराईं महादेव के जिया संगम पहुंचने की सूचना जैसे ही घाटी में फैली तो संगम तट पर श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों और देव वाद्ययंत्रों की थाप के बीच महादेव ने संगम में डुबकी लगाई। इस दौरान उपस्थित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने महादेव के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन साल बाद होने वाले इस आयोजन को लेकर पूरे इलाके में भारी उत्साह रहता है और संगम स्नान के साथ ही इस अनुष्ठान को पूर्ण माना जाता है।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!