हिमाचल की जेलों में क्षमता से 30% ज्यादा कैदी, सरकार ने विधानसभा में आंकड़े किए पेश

Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Aug, 2026 09:58 AM

himachal prisons hold 30 more inmates than capacity

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि राज्य की जेलों में क्षमता से लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा कैदी हैं। यहां मंजूर क्षमता 2,580 है, जबकि 3,355 कैदी रखे गए हैं। ये आंकड़े मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शाहपुर के विधायक केवल सिंह...

Shimla News : हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि राज्य की जेलों में क्षमता से लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा कैदी हैं। यहां मंजूर क्षमता 2,580 है, जबकि 3,355 कैदी रखे गए हैं। ये आंकड़े मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के एक 'स्टार्ड सवाल' (जिसका मौखिक जवाब दिया जाता है) के लिखित जवाब में दिए। पठानिया ने जेल की क्षमता, कैदियों के वर्गीकरण, चिकित्सा सुविधाओं, NDPS कैदियों और जेल के बुनियादी ढांचे के प्रस्तावित विस्तार के बारे में जानकारी मांगी थी।

'कुल कैदियों में से लगभग दो-तिहाई विचाराधीन कैदी'

सरकार के अनुसार, राज्य की 14 जेलों में अभी 1,113 दोषी, 2,203 विचाराधीन कैदी और 39 सिविल या निवारक हिरासत वाले लोग रखे गए हैं।आंकड़े बताते हैं कि कुल कैदियों में से लगभग दो-तिहाई विचाराधीन कैदी हैं, जो राज्य के सुधार गृहों पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। कई जेले अपनी मंजूर क्षमता से काफी ज्यादा कैदियों के साथ चल रही हैं। नाहन की मॉडल सेंट्रल जेल में 471 की क्षमता के मुकाबले 553 कैदी हैं, जबकि कांडा की मॉडल सेंट्रल जेल में 438 की क्षमता के मुकाबले 530 कैदी हैं। वहीं, धर्मशाला की लाला लाजपत राय डिस्ट्रिक्ट एंड ओपन होम जेल में 355 की मंजूर क्षमता के मुकाबले 552 कैदी हैं, जिससे यह राज्य की सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जेलों में से एक बन गई है। मंडी जिला जेल में 95 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 270 कैदी हैं, जबकि कुल्लू जिला जेल में 33 की मंजूर क्षमता के मुकाबले 76 कैदी हैं। किन्नौर जिला जेल में 183 की क्षमता के मुकाबले 237 कैदी हैं, जबकि चंबा जिला जेल में 147 की क्षमता के मुकाबले 193 कैदी हैं।

दूसरी जेलों में भी मंजूर क्षमता से ज्यादा कैदी पाए गए, जिनमें नूरपुर सब-जेल, सोलन जिला जेल, ऊना जिला जेल और नालागढ़ सब-जेल शामिल हैं। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए कैदियों से जुड़े सवालों के जवाब में सरकार ने कहा कि मौजूदा नियमों के तहत ऐसे दोषियों को ओपन एयर जेल में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जेल मैनुअल, 2021 और लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत NDPS दोषियों को ओपन एयर जेल में ट्रांसफ़र करने की मनाही है। सरकार ने विधानसभा को यह भी बताया कि कांगड़ा के नूरपुर, सोलन के बद्दी और ऊना में तीन और ड्रग टेस्टिंग लैब बनाने की मंजूरी दे दी गई है। इस कदम का मकसद ड्रग-टेस्टिंग सुविधाओं का विकेंद्रीकरण करना है, जो अभी जुंगा की मुख्य लैब तक ही सीमित हैं। सरकार ने बताया कि मॉडल सेंट्रल जेल नाहन, मॉडल सेंट्रल जेल कांडा, ज़िला जेल धर्मशाला और ओपन एयर जेल बिलासपुर में अभी चार डेडिकेटेड मेडिकल ऑफिसर तैनात हैं।दूसरी जेलों में, आस-पास के रीजनल अस्पतालों के डॉक्टर रोस्टर के हिसाब से जेलों का दौरा करते हैं।

सरकार ने कहा कि जिन कैदियों को खास इलाज की ज़रूरत होती है, उन्हें रीजनल अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में भेजा जाता है। हिमाचल प्रदेश में एक डेडिकेटेड हाई-सिक्योरिटी जेल बनाने के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि सही समय पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा। सरकार का यह जवाब जेल के बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव के बीच आया है, क्योंकि अभी जेलों में मंजूर क्षमता से 775 कैदी ज़्यादा हैं। 

प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें  
 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!