Edited By Swati Sharma, Updated: 05 Jul, 2026 06:29 PM

Shimla News : कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने कहा कि पशु चिकित्सकों का दायित्व अन्य चिकित्सकों की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जहां मनुष्य स्वयं अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकता है, वहीं पशुओं की पीड़ा को समझना और उसका उपचार...
Shimla News : कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने कहा कि पशु चिकित्सकों का दायित्व अन्य चिकित्सकों की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जहां मनुष्य स्वयं अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकता है, वहीं पशुओं की पीड़ा को समझना और उसका उपचार करना पशु चिकित्सकों की संवेदनशीलता, अनुभव एवं दक्षता पर निर्भर करता है। प्रो. चंद्र कुमार आज कुफरी में आयोजित हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के जनरल हाउस एवं सेमिनार को मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
'भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में अग्रणी'
चंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार कृषि एवं पशुपालन को एकीकृत कर किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में अग्रणी है तथा महिला स्वयं सहायता समूह इस क्षेत्र में सराहनीय योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिले के ढगवार में निर्माणाधीन दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र इस वर्ष अक्टूबर तक संचालित हो जाएगा। इस संयंत्र का संचालन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा किया जाएगा, जिससे प्रदेश में दुग्ध क्षेत्र को नई गति मिलेगी तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सकों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक रोडमैप तैयार करना चाहिए। विभिन्न मौसमों में पशुओं में होने वाली बीमारियों, आवश्यक दवाइयों एवं टीकों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
'प्रदेश में निराश्रित पशुओं की समस्या मुख्य रूप से गाय एवं बैलों तक सीमित'
कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कहा कि प्रदेश में निराश्रित पशुओं की समस्या मुख्य रूप से गाय एवं बैलों तक सीमित है, जबकि भैंसों को निराश्रित नहीं छोड़ा जाता। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों एवं नव नियुक्त पशु चिकित्सकों को इस सामाजिक चुनौती के समाधान हेतु शोध एवं व्यवहारिक प्रयास करने चाहिए। उन्होंने बताया कि पशुधन गणना के माध्यम से प्रदेश में कुल पशुधन एवं निराश्रित पशुओं की वास्तविक संख्या का आकलन किया जा रहा है, ताकि इसके अनुरूप प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को पशुपालन से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। डेयरी विकास के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के अंतर्गत उत्पादित गेहूं, मक्की एवं हल्दी जैसी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पंजाब एवं हरियाणा की हैचरियों के सहयोग से प्रदेश में पोल्ट्री एवं मत्स्य पालन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रदेश सरकार ने 'पहल' योजना तैयार कर केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी है। योजना के स्वीकृत होने पर जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि एसीपीएस (ACPS) के पुनर्जीवन के संबंध में एसोसिएशन एवं विभाग की संयुक्त समिति गठित की जाएगी, जिसके साथ शीघ्र बैठक आयोजित कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के निवर्तमान पदाधिकारियों को सम्मानित किया तथा केक काटकर उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
पशु चिकित्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ - डॉ. नीरज मोहन
हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. नीरज मोहन ने कहा कि पशु चिकित्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में पशु चिकित्सक घर-घर जाकर पशुओं का उपचार एवं पशुपालकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल में पशुपालन विभाग को पहली बार मुख्यधारा में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार हिमाचल प्रदेश ने दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू कर ऐतिहासिक पहल की है। इससे पशुपालकों को आर्थिक संबल मिला है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि तभी संभव है जब पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा और इसमें पशु चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।