Hamirpur: 300 वर्ष पुराने टौणीदेवी माता मंदिर में आज भी होती है मुराद पूरी

Edited By Kuldeep, Updated: 22 Jun, 2026 09:59 PM

hamirpur taunidevi mata

चौहान वंश की कुलदेवी माता टौणी देवी का मंदिर करीब 350 वर्ष पुराना है तथा आज भी यहां पर पत्थर टकराने से ही हर मुराद पूरी होती है।

हमीरपुर (राजीव): चौहान वंश की कुलदेवी माता टौणी देवी का मंदिर करीब 350 वर्ष पुराना है तथा आज भी यहां पर पत्थर टकराने से ही हर मुराद पूरी होती है। बता दें कि करीब 350 साल पहले जब दिल्ली पर मुगलों का आधिपत्य हो गया तो उन्होंने राजपूतों की मां-बहनों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया। मुगल राजपूतों के जनेऊ उतार कर धर्म परिवर्तन करवाने लगे तो चौहान वंश के 12 भाइयों ने टौणीदेवी के इस पहाड़ी दुर्गम क्षेत्र में शरण ली थी, ताकि अपने धर्म व परिजनों की रक्षा कर सकें।

उनके साथ उनकी बहन भी थी, जिसे सुनाई नहीं देता था। परिवार के मुखिया ने बाकर-कुनाह व पुंग खड्ड के केंद्र पर भवन की योजना बनाई मगर जिस स्थान पर आधारशिला रखी गई वहां पर खून की धारा निकलने लगी और इसे देख कर सभी अचंभित हो गए। माता को सुनाई नहीं देता था इसलिए भक्त अपनी मन्नत के लिए पिंडी के पास रखे 2 पत्थरों को आपस में टकराते हैं। मान्यता है कि पत्थर की आवाज से माता मन्नत सुन लेती हैं और पूरी कर देती हैं। टौणी देवी बाजार ही माता के नाम पर बसा है। चौहान वंश का कोई भी शुभ काम करने से पहले यहां माथा टेकने की परम्परा है।       

माता ने इस स्थान पर की थी घोर तपस्या
परिवार के सदस्यों ने कुल पुरोहित से इस बारे में सलाह ली तो कुल पुरोहित ने इसके लिए घर की कुंवारी कन्या को दोषी बताया। वहीं घर की महिलाओं ने माता टौणीदेवी पर आरोप लगाए, जिस पर क्षुब्ध माता ने इस स्थान पर घोर तपस्या की और आषाढ़ मास के 10 प्रविष्टे को अंतर्ध्यान हो गईं। उन्हीं की याद में उनके भाइयों ने यहां छोटे से मंदिर की स्थापना की, जोकि आज भव्य रूप धारण कर चुका है। माता की याद में यहां हर वर्ष मेले का आयोजन होता है तथा इस बार मेला 24 जून को होगा। इसमें श्रद्धालु दूर-दूर से यहां माता के दर्शनों को पहुंचते हैं।

मेले में कई राज्यों से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
चौहान वंश की कुलदेवी माता टौणीदेवी मेले में पंजाब हरियाणा, दिल्ली, राज्यस्थान, जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से भी चौहान वंश के लोग माता के दर्शन करने आते हैं। वही मंदिर की पुजारन पिंकी देवी ने बताया कि यहां पर आने से हर आदमी की मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पर वर्षों से कमेटी काम कर रही है। श्रद्धालुओं को रहने के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। वहीं मेले में बाहरी राज्यों के व्यापारियों की दुकानें सजनी शुरू हो गई हैं।

 

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