Edited By Vijay, Updated: 12 Jun, 2026 09:06 PM

हिमाचल की विलुप्त रियासतों और स्वतंत्रता-पूर्व की रणनीतियों के प्रतीक बिलासपुर के कोटधार स्थित बच्छरेटू किले और ऊना की सोलासिंघीधार स्थित सोलासिंघी किले आज सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं।
शाहतलाई (हिमल): हिमाचल की विलुप्त रियासतों और स्वतंत्रता-पूर्व की रणनीतियों के प्रतीक बिलासपुर के कोटधार स्थित बच्छरेटू किले और ऊना की सोलासिंघीधार स्थित सोलासिंघी किले आज सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। विश्व धरोहर फाऊंडेशन के अध्यक्ष व विरासत विशेषज्ञ डॉ. पीसी शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण ये ऐतिहासिक धरोहरें अब जर्जर अवस्था में पहुंच गई हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि ये भव्य राजमहल नहीं, बल्कि सरहदों की सुरक्षा और दुश्मनों पर नजर रखने वाले सामरिक दुर्ग थे। कभी मजबूत पत्थरों और बेहतरीन जल संरक्षण के लिए मशहूर ये किले आज भूस्खलन, बादल फटने, वनाग्नि और भूकंप जैसी मार झेल रहे हैं। 14वीं सदी में 3000 फुट पर बना आयताकार बच्छरेटू किला आज भी गोबिंद सागर का सुंदर नजारा और अपने अवशेष संजोए है। वहीं, ऊना के कुटलैहड़ स्थित सोलासिंघी किले की रक्षात्मक दीवारें अब धीरे-धीरे ढह रही हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और संस्कृति विभाग से मुरम्मत की गुहार
इन धरोहरों को बचाने के लिए डॉ. शर्मा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य भाषा, कला व संस्कृति विभाग से विशेष विरासत संरक्षण कार्यक्रम चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर किलों से झाड़ियां और पेड़ों की जड़ें हटाकर मुरम्मत की जाए। साथ ही प्राचीन जलाशयों, बावड़ियों और वर्षा जल संचयन प्रणालियों को दोबारा बहाल किया जाए।
पर्यटन से बदलेगी तस्वीर, बनेंगे फ्रैंड्स ऑफ हैरिटेज
डॉ. शर्मा ने एक अहम सुझाव देते हुए कहा कि इन किलों को पर्यटन सर्किट से जोड़कर सामुदायिक होम स्टे, गाइडेड ट्रैकिंग और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया जाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने स्थानीय लोगों का फ्रैंड्स ऑफ हैरिटेज’ समूह बनाने की भी वकालत की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार, पुरातत्व विभाग और समाज अब नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां इस गौरवशाली इतिहास से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगी।