Edited By Vijay, Updated: 05 Jul, 2026 12:57 PM

कोरोना महामारी के दौरान जब कई लोगों की नौकरियां छिन गईं और वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे, तब करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी के एक युवा ने आपदा को अवसर में बदल दिया।
करसोग (धर्मवीर): कोरोना महामारी के दौरान जब कई लोगों की नौकरियां छिन गईं और वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे, तब करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी के एक युवा ने आपदा को अवसर में बदल दिया। निजी कंपनी की नौकरी छूटने के बाद युवा बालकृष्ण ने हार नहीं मानी, बल्कि गांव लौटकर खेती को अपनी नई पहचान बना लिया। आज अपनी आधुनिक सोच, कड़ी मेहनत और बागवानी के प्रति समर्पण के दम पर वे क्षेत्र के एक सफल स्ट्रॉबेरी उत्पादक बन गए हैं।
अपनी कार से करते हैं डायरेक्ट सेलिंग
बालकृष्ण ने गांव लौटकर अपनी लगभग एक बीघा भूमि पर आधुनिक तकनीक से स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती शुरू की। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन आज उनकी स्ट्रॉबेरी ने अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और स्वाद के चलते स्थानीय बाजार में एक खास पहचान बना ली है। मुनाफे को बढ़ाने के लिए बालकृष्ण बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहते। वे खुद अपनी कार से फसल को बाजार तक ले जाते हैं और सीधे ग्राहकों को बेचते हैं, जिससे उन्हें फसल के बेहतरीन दाम मिल रहे हैं।
1 बीघा जमीन से 15 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आय
वर्तमान में स्थानीय बाजार में उनकी स्ट्रॉबेरी 300 से 500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। इसी का नतीजा है कि महज एक बीघा भूमि से बालकृष्ण हर महीने 12 से 15 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इस कार्य में परिवार के सभी सदस्य उनका पूरा सहयोग करते हैं, जिसके चलते यह बागवानी उनके परिवार के लिए स्थायी स्वरोजगार का एक मजबूत आधार बन गई है।
2 लाख पौधों की नर्सरी तैयार की
बालकृष्ण की सोच केवल अपनी कमाई तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्ट्रॉबेरी के लगभग दो लाख पौधों की नर्सरी तैयार की है। उनकी योजना है कि इनमें से करीब एक लाख पौधे वे अपने खेतों में लगाएंगे, जबकि बाकी पौधे क्षेत्र के अन्य किसानों को उपलब्ध कराएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान इस मुनाफे वाली खेती से जुड़ सकें। इसके अलावा, बालकृष्ण भविष्य में ब्लूबेरी, खुबानी और प्लम जैसी उच्च मूल्य वाली फल फसलों की खेती का भी विस्तार करना चाहते हैं।

युवाओं के लिए बने प्रेरणास्त्रोत
कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और प्रशिक्षण का सीधा लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। सोमाकोठी के युवा किसान बालकृष्ण की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि मेहनत, आधुनिक सोच और सही मार्गदर्शन मिले, तो पहाड़ों की छोटी सी जमीन भी समृद्धि की नई कहानी लिख सकती है। बालकृष्ण अब उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं, जो पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक बागवानी को स्वरोजगार बनाना चाहते हैं।
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