Kangra: खून चढ़ाने में लापरवाही से महिला की मौत, नर्सिंग होम को 10 लाख रुपए मुआवजे के आदेश

Edited By Kuldeep, Updated: 27 Aug, 2026 07:26 PM

dharamshala negligence compensation

कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के एक गंभीर मामले में नर्सिंग होम, नगरोटा बगवां को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतका के परिजनों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

धर्मशाला (प्रियंका): कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के एक गंभीर मामले में नर्सिंग होम, नगरोटा बगवां को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतका के परिजनों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अस्पताल को 25 हजार रुपए मुकद्दमा खर्च के रूप में देने तथा 50 हजार रुपए दंडात्मक राशि जिला उपभोक्ता विधिक सहायता कोष, कांगड़ा में जमा करवाने के भी निर्देश दिए हैं। मामला पालमपुर तहसील के गढ़ गांव निवासी स्वर्गीय देवी सिंह की पत्नी मनोरमा देवी से जुड़ा है। 65 वर्षीय मनोरमा देवी के बाएं घुटने के टोटल नी रिप्लेसमैंट के लिए उन्हें 22 मार्च 2023 को नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था। सर्जरी के बाद अस्पताल ने 24 मार्च को रक्त चढ़ाया, जिसके कुछ ही समय बाद महिला को कंपकंपी, बेचैनी, जलन, चक्कर और बेहोशी जैसी गंभीर समस्या हुई। बाद में उन्हें डा. आरपीजीएमसी टांडा रैफर किया गया, जहां 28 मार्च 2023 को उनकी मौत हो गई।

आयोग ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि रक्त की यूनिट 23 मार्च को दोपहर 1:54 बजे अस्पताल को जारी की गई थी, जबकि उसे करीब 22 घंटे बाद 24 मार्च को चढ़ाया गया। आयोग के अनुसार रक्त को निर्धारित तापमान पर रखने और तय समय में इस्तेमाल करने संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। अस्पताल द्वारा पेश किए गए रैफ्रिजरेटर के रिकॉर्ड और तापमान निगरानी व्यवस्था पर भी आयोग ने सवाल उठाए। मामले में रक्त केंद्र की जांच में यह पाया गया कि जारी किया गया रक्त मरीज के नमूने से कम्पेटिबल था। हालांकि अस्पताल में रक्त के भंडारण, रिकॉर्ड रखने और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आईं। आयोग ने उपचार रिकॉर्ड और एडवर्स ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन फॉर्म में भी रक्त चढ़ाने के समय तथा मरीज के वाइटल पैरामीटर्स को लेकर विरोधाभास पाए।

रक्त चढ़ाने में प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ
आयोग ने विशेषज्ञ चिकित्सक डा. सुजीत रैना की गवाही और उपलब्ध मैडीकल रिकॉर्ड के आधार पर माना कि महिला की मौत का मूल कारण गंभीर सेप्सिस, मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम, सेप्टिक शॉक और संदिग्ध ट्रांसफ्यूजन रिलेटेड एक्यूट लंग इंजरी था। आयोग ने कहा कि अस्पताल ने रक्त चढ़ाने के मामले में निर्धारित मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और इसे गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही माना। आयोग ने पंचशील नर्सिंग होम के खिलाफ शिकायत मंजूर करते हुए 10 लाख रुपए मुआवजा, 25 हजार रुपए मुकद्दमा खर्च और 50 हजार रुपए दंडात्मक जुर्माना देने का आदेश दिया। वहीं रक्त केंद्र, डा. आरपीजीएमसी टांडा और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ लापरवाही साबित नहीं होने पर शिकायत खारिज कर दी गई। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

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