Edited By Vijay, Updated: 28 Aug, 2026 10:55 PM

सरकारी स्कूलों में बच्चों के बीच पढ़ने की आदत को मजबूत करने और उनमें रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए समग्र शिक्षा ने स्कूलों में ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ रीडिंग कैंपेन चलाया है।
शिमला (प्रीति): सरकारी स्कूलों में बच्चों के बीच पढ़ने की आदत को मजबूत करने और उनमें रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए समग्र शिक्षा ने स्कूलों में ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ रीडिंग कैंपेन चलाया है। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से पढ़ने, पढ़ी गई सामग्री पर चिंतन करने और अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करना है। विभाग की मानें तो यह अभियान राष्ट्रीय पठन अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका मकसद बच्चों में केवल किताब पढ़ने की आदत विकसित करना नहीं, बल्कि पढ़ी गई सामग्री पर सोचने, अपने विचार व्यक्त करने, रचनात्मकता बढ़ाने और कहानियों से जुड़ने की क्षमता विकसित करना है। इस अभियान के तहत स्कूलों में प्रतिदिन 10 मिनट का विशेष पठन समय निर्धारित किया गया है। बच्चों को आयु के अनुरूप पुस्तकें, पत्रिकाएं, कहानी की किताबें और स्टोरी कार्ड उपलब्ध करवाए जाएंगे। पुस्तक पढ़ने के बाद बच्चों को सुबह की सभा में उसके बारे में अपने विचार सांझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे बच्चों में निरंतर पढ़ने की आदत, पठन प्रवाह और आनंददायक पठन संस्कृति विकसित करने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस यानि 8 सितम्बर को सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे तक राष्ट्रव्यापी रीड-ए-थॉन आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चे, शिक्षक, अभिभावक एक साथ पढ़ेंगे। इसके बाद बच्चे अपने पढ़ने के अनुभव और विचार सांझा करेंगे तथा संक्षिप्त लेखन व अन्य रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
हर बच्चे का बनेगा रीडिंग पासपोर्ट, 100 शब्दों में लिखेंगे अपनी कहानी
समग्र शिक्षा के निदेशक राजेश शर्मा ने कहा है कि माई लाइफ, माई लाइब्रेरी कार्ड गतिविधि के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए व्यक्तिगत रीडिंग पासपोर्ट तैयार किया जाएगा। इसमें बच्चे द्वारा पढ़ी गई पुस्तकों, पसंदीदा पात्रों, नए शब्दों, भावनाओं और पढ़ने के अनुभव दर्ज किए जाएंगे। इससे बच्चे अपनी पठन यात्रा को स्वयं भी ट्रैक कर सकेंगे। अभियान में बच्चों को रचनात्मक लेखन से भी जोड़ा जाएगा। पुस्तक पढ़ने के बाद उसके पात्रों, घटनाओं या विचारों से प्रेरित होकर बच्चे अधिकतम 100 शब्दों की अपनी छोटी कहानी लिखेंगे। चयनित कहानियों को कक्षा अथवा स्कूल पुस्तकालय में प्रदर्शित किया जाएगा।
कक्षाओं में बनेंगे रीडिंग रिफ्लैक्शन कॉर्नर, व्हाट्सएप पर मिलेंगी बहुभाषी डिजिटल किताबें
इसके अलावा कक्षाओं में रीडिंग रिफ्लैक्शन कॉर्नर बनाए जाएंगे। यहां बच्चे किताब पढ़ने के बाद अपना पसंदीदा हिस्सा, नई सीख, भावनाएं और सवाल सांझा कर सकेंगे। रीड अलाऊड सत्रों में बच्चे कहानी, कविता या लेख पढ़कर सुनाएंगे और उसके आधार पर चर्चा भी की जाएगी। बच्चों को घर पर पढ़ने के लिए डिजिटल स्टोरीबुक उपलब्ध करवाने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए स्कूलों के व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से लिटरेसी क्लाऊड की बहुभाषी पुस्तकों के क्यूआर कोड सांझा किए जाएंगे। इससे बच्चे स्कूल के अलावा घर पर भी अपनी पसंद की किताबें पढ़ सकेंगे।
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