Sirmaur: साढ़े 4 महीने बाद खुले चूड़धार मंदिर के कपाट, यात्रा पर जाने से पहले पढ़ें गाइडलाइन

Edited By Jyoti M, Updated: 14 Apr, 2026 01:10 PM

churdhar temple gates open after 4 months

आस्था स्थल चूड़धार मंदिर के कपाट करीब साढ़े 4 महीने के लंबे अंतराल के बाद विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया है, लेकिन चोटी पर मौजूदा हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।

नाहन (आशु): आस्था स्थल चूड़धार मंदिर के कपाट करीब साढ़े 4 महीने के लंबे अंतराल के बाद विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया है, लेकिन चोटी पर मौजूदा हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूरी तरह अनुमति न दिए जाने के बावजूद, आस्था के चलते लोग चूड़धार पहुंच रहे हैं। 100 से अधिक श्रद्धालु बर्फ से ढके दुर्गम मार्ग को पार कर मंदिर पहुंचे और भगवान शिरगुल महाराज के दर्शन किए।

ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में अभी भी भारी बर्फ जमी हुई है, जिससे यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। नौहराधार-चूड़धार मार्ग के कई हिस्सों में मोटी बर्फ की परत जमी होने के कारण फिसलन और रास्ता भटकने की आशंका बनी हुई है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव झेलना पड़ रहा है। सराय और लंगर सेवा अभी शुरू नहीं हो पाई है, जिससे ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ रही है। वहीं, पेयजल के लिए भी श्रद्धालु बर्फ पिघलाने को मजबूर हैं, क्योंकि प्राकृतिक जल स्रोत जमे हुए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से फिलहाल यात्रा से परहेज करने की अपील की है और मौसम अनुकूल होने के बाद ही चूड़धार आने की सलाह दी है।

बर्फ के बीच भी अटूट है आस्था
कठिन हालात के बावजूद श्रद्धालुओं का पहुंचना यह दर्शाता है कि आस्था हर परिस्थिति में लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। दुर्गम रास्ते, कड़ाके की ठंड और सीमित सुविधाएं भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पाईं। चूड़धार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के साथ-साथ गहरी संतुष्टि और श्रद्धा साफ झलकती नजर आई। यही अटूट विश्वास इस यात्रा को और विशेष बनाता है।

भौगोलिक परिस्थितियां चुनौती
ऊंचाई, घने जंगल और लंबा पैदल ट्रैक इस यात्रा को सामान्य दिनों में भी कठिन बनाते हैं, जबकि सर्दियों के बाद हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई स्थानों पर रास्ते संकरे और ढलान वाले हैं, जहां जरा सी चूक परेशानी खड़ी कर सकती है। इसके साथ ही मौसम का अचानक बदलना भी यात्रियों के लिए अतिरिक्त कठिनाई पैदा करता है, जिससे पूरी यात्रा सतर्कता की मांग करती है। दुर्गम क्षेत्र और मौसम की अनिश्चितता के कारण आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य करना आसान नहीं होता। इससे पहले भी चोटी पर कई मामलों में देखा गया है कि खराब मौसम और बर्फबारी के चलते रैस्क्यू टीमों का मौके तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे हालात में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी समस्या में बदल सकती है, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।

यात्रा से पहले रखें इन बातों का ध्यान
जानकारों की मानें तो यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और मार्ग की ताजा जानकारी जरूर लें और पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाइयां साथ रखें। खाने-पीने का हल्का सामान और पानी की व्यवस्था पहले से कर लें। कोशिश करें कि अकेले यात्रा न करें, बल्कि समूह में जाएं ताकि आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद मिल सके। साथ ही ध्यान रखें कि चोटी पर मोबाइल नैटवर्क की काफी दिक्कत रहती है। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी बेहद जरूरी है।

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