Himachal: मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से भारत बना वैश्विक लीडर : अनुराग

Edited By Kuldeep, Updated: 11 Apr, 2026 08:40 PM

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पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने टीआईई चंडीगढ़ द्वारा आयोजित टीआईई कॉन चंडीगढ़ 2026 में बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए......

चंडीगढ़ (ब्यूरो): पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने टीआईई चंडीगढ़ द्वारा आयोजित टीआईई कॉन चंडीगढ़ 2026 में बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के स्टार्टअप फाऊंडर्स, उद्यमियों और युवा व्यापार नेताओं से मोदी सरकार के पिछले एक दशक के परिवर्तनकारी कानूनों और नीतिगत सुधारों द्वारा सृजित अभूतपूर्व अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “भारत अब उभरती हुई क्षमता वाले राष्ट्र से आगे बढ़कर पूर्ण क्षमता प्राप्त राष्ट्र बन चुका है और अब वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का समय आ गया है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसका जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है। देश में 2.12 लाख से अधिक डीपीआईआईटी स्टार्टअप और 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जो इसे विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाता है।

उन्होंने 2013 के आर्थिक संकट की तुलना की जब इकोनॉमिस्ट ने भारत को 1991 के बाद की सबसे बुरी आर्थिक स्थिति में बताया था। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा हम उभरते नहीं हैं, हम उभर चुके हैं और अब समय है ऊंचाई छूने का, राष्ट्रीय चैंपियंस से वैश्विक लीडर्स बनने का है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से अब 50 प्रतिशत से अधिक टियर-II और टियर-III शहरों से आ रहे हैं, जो उद्यमिता के गहरे लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है। इनमें से 1.02 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या पार्टनर है, जो भारत की नवाचार अर्थव्यवस्था की बढ़ती समावेशी प्रकृति को रेखांकित करता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तीसरी तिमाही वित्तीय वर्ष 2025 में 18 प्रतिशत लाभ वृद्धि दर्ज कर चुके हैं, कुल निर्यात जनवरी 2026 में 13.17 प्रतिशत बढ़कर 80.45 बिलियन डॉलर पहुंच गया है और रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 रुपए करोड़ पर पहुंच गया जोकि पिछले वर्ष की तुलना में 62.7 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है। अनुराग सिंह ठाकुर ने भारत के एमएसएमई क्षेत्र की परिवर्तनकारी वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। आज देश में 6.63 करोड़ से अधिक पंजीकृत एमएसएमई हैं जो लगभग 26.77 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, जीडीपी में करीब 30 प्रतिशत योगदान और कुल निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।

सरकार ने एमएसएमई उद्यमियों को 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक ऋण दिए हैं जोकि पिछले सरकार के 12 लाख करोड़ रुपए से दोगुना हैं। ऋण स्वीकृति अब महीनों के बजाय मात्र 55 मिनट में हो रही है। केंद्रीय बजट में 10,000 करोड़ रुपए का एमएसई ग्रोथ फंड और 2,000 करोड़ रुपए का सैल्फ-रिलायंट इंडिया फंड अनुदान भी शुरू किया गया है। ग्रामीण भारत को उद्यमिता का अगला मोर्चा बताते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि 1.2 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों और उनसे जुड़ी 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की ताकत महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को भारत के एमएसएमई परिदृश्य को नया आयाम देगी। पहले से ही 3 करोड़ से अधिक लखपति दीदियां बन चुकी हैं, 2029 तक लक्ष्य 6 करोड़ का है। जब भारत आत्मनिर्भरता की कहानी लिखेगा, तो एमएसएमई उसका कवर पेज और प्रथम अध्याय होंगे”।

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