Edited By Vijay, Updated: 19 Aug, 2026 04:56 PM

चम्बा जिले के मैहला विकास खंड की मैहला और धिमला पंचायत में मनरेगा व अन्य ग्रामीण विकास कार्यों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। कागजों में लाखों रुपए के काम पूरे दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने के आरोप में एक आऊटसोर्स कनिष्ठ अभियंता (जेई)...
चम्बा (काकू चौहान): चम्बा जिले के मैहला विकास खंड की मैहला और धिमला पंचायत में मनरेगा व अन्य ग्रामीण विकास कार्यों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। कागजों में लाखों रुपए के काम पूरे दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने के आरोप में एक आऊटसोर्स कनिष्ठ अभियंता (जेई) विजय कुमार को तुरंत प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया गया है। बीते मंगलवार को खंड विकास अधिकारी मैहला द्वारा इसके औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई की आंच कनिष्ठ लेखापाल (मनरेगा) और ग्राम रोजगार सेवक तक भी पहुंच गई है। इन दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इन पर मैहला व धिमला पंचायत में बिना काम हुए फर्जी भुगतान करवाने में सहायक होने का गंभीर आरोप है। यदि एक माह के भीतर इनका संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी।
कुठवाड़ी के रमेश कुमार ने खोली थी घोटाले की पोल
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कुठवाड़ी गांव के निवासी रमेश कुमार की शिकायत के बाद हुआ। रमेश ने ग्राम पंचायत मैहला और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मनरेगा व अन्य विकास कार्यों में धांधली की शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद बीडीओ कार्यालय ने प्रारंभिक जांच की, जबकि विस्तृत जांच एसडीएम चम्बा द्वारा की गई। जांच रिपोर्ट में रमेश कुमार द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए।
बिना टैंडर 42 लाख की टाइलें खरीदीं, बीआईएस सर्टिफिकेट भी था एक्सपायर
जांच में सामने आया कि मैहला पंचायत में 42 लाख 48 हजार 300 रुपए का भुगतान बिना जमीन पर काम हुए ही कर दिया गया। जेई की तकनीकी निगरानी में हुए इंटरलॉकिंग टाइलों के इस काम को कागजों में पूरा दिखा दिया गया और फर्जी प्रविष्टियां माप पुस्तिका में दर्ज कर दी गईं। आदेशों में स्पष्ट उल्लेख है कि टाइलों की खरीद के लिए न तो कोई निविदा बुलाई गई और न ही अखबारों में विज्ञापन दिया गया। मनमाने ढंग से 35 रुपए प्रति टाइल का रेट तय कर लिया गया। जिस विक्रेता से टाइलें खरीदी गईं, उसका भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणपत्र भी एक्सपायर हो चुका था।
धिमला पंचायत में कागजों में काम पूरा, प्रधान भी ठहराए गए जिम्मेदार
यह फर्जीवाड़ा सिर्फ मैहला तक सीमित नहीं था। ग्राम पंचायत धिमला में भी जेई द्वारा काम पूरा होने का फर्जी प्रमाण पत्र दिया गया। जांच समिति ने पाया कि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ था, लेकिन इसके बावजूद 24 लाख 25 हजार 248 रुपए का भुगतान कर दिया गया। जांच समिति ने इस धांधली के लिए जेई के साथ-साथ पंचायत प्रधान और अन्य कर्मचारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
डीसी के आदेशों पर एक्शन, जेई से मांगा रिकॉर्ड
डीसी चम्बा के 17 अगस्त के निर्देशों और एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर बीडीओ मैहला ने आरोपी जेई की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। आदेशों में जेई को संबंधित ग्राम पंचायतों का समस्त रिकॉर्ड और प्रभार तुरंत अन्य कनिष्ठ अभियंताओं को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मनरेगा कार्यों में अनियमितता बर्दाश्त नहीं होगी : बीडीओ
मामले को लेकर बीडीओ मैहला बशीर खान ने बताया कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जेई की सेवाएं समाप्त की गई हैं। वहीं, मामले में शामिल दो अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मनरेगा कार्यों में किसी भी स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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