Edited By Kuldeep, Updated: 11 Apr, 2026 04:16 PM

हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स बिलासपुर में हृदय रोगियों के उपचार को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।
बिलासपुर (बंशीधर): हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स बिलासपुर में हृदय रोगियों के उपचार को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। संस्थान के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के लिए पोर्टेबल कार्डियक बायोमार्कर मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से अब मरीजों के खून में ट्रोपोनिन स्तर की तुरंत जांच संभव हो सकेगी, जिससे हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रोपोनिन जांच हृदय की मांसपेशियों को हुए नुक्सान का सटीक संकेत देती है और समय पर निदान मरीज की जान बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अब तक इस प्रकार की जांच के लिए मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों या लंबी लैब प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी हो जाती थी लेकिन पोर्टेबल मशीन के आने से आपातकालीन स्थितियों में तुरंत रिपोर्ट मिल सकेगी और डाक्टर बिना समय गंवाए उपचार शुरू कर सकेंगे। एम्स प्रशासन के इस फैसले से न केवल जिला बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को भी सीधा लाभ मिलेगा। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब छोटे लक्षणों को नजरअंदाज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि नजदीक ही उन्नत जांच सुविधा उपलब्ध होगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ या अन्य बड़े अस्पतालों की ओर रैफर करने की आवश्यकता भी कम होगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। एम्स प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है। एम्स प्रशासन का कहना है कि संस्थान में आधुनिक उपकरणों को स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि गंभीर बीमारियों का समय पर पता लग सके और लोगों को समय पर सही उपचार सुविधा उपलब्ध हो सके।