Edited By Vijay, Updated: 14 Aug, 2026 11:03 PM

प्रदेश हाईकोर्ट में आऊटसोर्स भर्तियों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा खुलासा किया है। सरकार द्वारा अदालत में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में इस समय 1 लाख से भी अधिक पद...
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट में आऊटसोर्स भर्तियों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा खुलासा किया है। सरकार द्वारा अदालत में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में इस समय 1 लाख से भी अधिक पद खाली पड़े हैं। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने यह आधिकारिक डेटा हलफनामे के जरिए प्रस्तुत किया है। इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आऊटसोर्सिंग के जरिए स्टाफ नर्सों की भर्ती के टैंडर में पारदर्शिता की कमी पर भी कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट में पेश किए गए मुख्य आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 3,36,542 है। इनमें से भर्ती नियमों के तहत वर्तमान में 2,28,891 पदों पर कर्मचारी तैनात हैं। प्रदेश में इस समय कुल 1,07,466 पद खाली चल रहे हैं, जिन्हें भरा जाना बाकी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कुल 14,619 लोगों को आऊटसोर्स के माध्यम से काम पर लगाया गया है। सरकार ने अदालत को बताया कि 1 जनवरी 2023 से लेकर अब तक भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाई गई है।
साढ़े तीन साल में भर्ती नियमों के अनुसार सीधे तौर पर 10,989 पद भरे गए हैं और लोक सेवा आयोग और हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से 12,004 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इस याचिका के साथ ही स्टाफ नर्स भर्ती मामले के साथ जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आऊटसोर्स आधार पर 60 स्टाफ नर्सों की आपूर्ति के लिए दी गई टैंडर मंजूरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कमेटी की बैठक की कार्यवाही के रिकॉर्ड का संज्ञान लेते हुए कहा कि टैंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य दावेदार कंपनियों को बाहर करने का कोई वैध और स्पष्ट आधार बैठक के ब्यौरे में नहीं दिखाई देता।
किस आधार पर अन्य दावेदारों को अयोग्य ठहराकर एक विशेष कंपनी के पक्ष में मांग तय की गई, यह रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है। इस विसंगति को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को इस टैंडर प्रक्रिया के संबंध में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। अदालत में याचिकाकर्त्ताओं के वकीलों ने सरकार द्वारा पेश किए गए इन नए हलफनामों और आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। कोर्ट ने इस टैंडर विवाद और मुख्य आऊटसोर्स भर्ती मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई के लिए 8 सितम्बर 2026 की तारीख तय की है।
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