पिता करते हैं मजदूरी, बेटियों ने रच दिया इतिहास! सिरमौर की 2 सगी बहनों ने एक साथ क्रैक किया UGC-NET

Edited By Vijay, Updated: 29 Aug, 2026 03:43 PM

2 real sisters qualified ugc net

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के अंतर्गत आते शिलाई के बूटियाना गांव की रहने वाली 2 सगी बहनों काजल शर्मा और मंजू शर्मा ने यूजीसी-नैट परीक्षा क्वालीफाई कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का परिचय दिया है।

नाहन (आशु): हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के अंतर्गत आते शिलाई के बूटियाना गांव की रहने वाली 2 सगी बहनों काजल शर्मा और मंजू शर्मा ने यूजीसी-नैट परीक्षा क्वालीफाई कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का परिचय दिया है। काजल ने हिंदी विषय, जबकि बड़ी बहन मंजू ने इतिहास विषय में यह परीक्षा उत्तीर्ण की। दोनों की उपलब्धि से परिवार के साथ बूटियाना और शिलाई क्षेत्र में खुशी का माहौल है। दोनों बहनें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से पढ़ाई कर रही हैं। नियमित अध्ययन के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। काजल और मंजू के अनुसार परीक्षा की तैयारी के दौरान निरंतर अध्ययन और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।

सैट परीक्षा में भी हासिल कर चुकी हैं सफलता
यूजीसी-नैट से पहले दोनों बहनें सेट परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं। काजल शर्मा ने हिंदी विषय में हाल ही में सैट परीक्षा पास की थी। इसके बाद यूजीसी-नैट में सफलता हासिल की। मंजू शर्मा ने इतिहास विषय में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है।

पिता करते हैं दिहाड़ी-मजदूरी
काजल और मंजू के पिता रमेश शर्मा दिहाड़ी-मजदूरी का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद बेटियों की पढ़ाई जारी रही। सीमित साधनों के बीच दोनों ने उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लगातार प्रयास किया। परिवार की परिस्थितियों ने दोनों के सामने चुनौतियां जरूर रखीं, लेकिन उन्होंने इन्हें अपनी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। यूजीसी-नैट में मिली सफलता उनके लंबे शैक्षणिक प्रयास का परिणाम है।

दोनों बहनों की सफलता पर खुशी का माहौल
काजल और मंजू की सफलता पर परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि दोनों बहनों ने बूटियाना गांव के साथ शिलाई क्षेत्र और सिरमौर जिले का नाम रोशन किया है। दोनों बहनों की उपलब्धि क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए भी मिसाल है, जो सीमित सुविधाओं के बावजूद उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ना चाहते हैं। काजल और मंजू ने अपनी उपलब्धि से यह संदेश दिया है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास किया जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है।

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