Kangra: श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर का नया भवन जल्द होगा पूरा, हिमाचली शैली में हो रही कारीगरी

Edited By Kuldeep, Updated: 11 Apr, 2026 06:18 PM

palampur adi himani chamunda building construction

लगभग 10,000 फुट की ऊंचाई पर दिव्यता एवं भव्यता का अनूठा संगम आध्यात्मिकता से सराबोर करेगा। श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर में नए भवन में प्रकृति और परंपरा के अद्भुत संगम के बीच मां चामुंडा का दिव्य विग्रह शीघ्र ही भव्य गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

पालमपुर (भृगु): लगभग 10,000 फुट की ऊंचाई पर दिव्यता एवं भव्यता का अनूठा संगम आध्यात्मिकता से सराबोर करेगा। श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर में नए भवन में प्रकृति और परंपरा के अद्भुत संगम के बीच मां चामुंडा का दिव्य विग्रह शीघ्र ही भव्य गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। गर्भगृह को विशेष रूप से देवदार की लकड़ी पर पारंपरिक हिमाचली नक्काशी के माध्यम से सजाया जा रहा है, जिससे इसकी दिव्यता और भव्यता और अधिक निखरकर सामने आएगी। इस कार्य का उद्देश्य मंदिर को वही पुरातन स्वरूप देना है, जो हिमाचल के ऐतिहासिक देव-स्थलों की पहचान रही है। मंदिर प्रशासन द्वारा नए भवन का निर्माण कार्य 31 मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भवन और छत का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि अब आंतरिक साज-सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गर्भगृह के लिए तैयार किए गए लकड़ी के पैनलों को घोड़ों और खच्चरों के माध्यम से कठिन पहाड़ी मार्गों से मंदिर परिसर तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि शेष कार्य शीघ्र पूरा किया जा सके। यद्यपि कपाट खुलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की आस थी, परंतु क्षेत्र में लगातार खराब मौसम, बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण कार्य प्रभावित हुआ है।
मणिकर्ण में तैयार करवाया जा रहा गर्भगृह

मंदिर के गर्भगृह में किया जा रहा लकड़ी का कार्य कुल्लू जिले के मणिकर्ण में तैयार करवाया जा रहा है। इस नक्काशी का स्वरूप प्राचीन मंदिरों की शैली पर आधारित है। पारंपरिक कला में दक्ष कारीगरों की देखरेख में यह कार्य बारीकी से किया जा रहा है, जिससे मंदिर के गर्भगृह को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त होगा। हिमाचल के प्राचीन मंदिरों की तर्ज पर ही अनुभवी कारीगरों की देखरेख में देवदार की लकड़ी पर बारीक नक्काशी की जा रही है। इस कार्य का उद्देश्य मंदिर को वही पुरातन स्वरूप देना है, जो हिमाचल के ऐतिहासिक देव स्थलों की पहचान रही है।

निर्माण कार्य में होती रही है देरी
विदित रहे कि वर्ष 2014 में मंदिर परिसर भीषण अग्निकांड की चपेट में आ गया था, जिसके बाद नए भवन के निर्माण का निर्णय लिया गया। यद्यपि यह कार्य विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से कई बार बाधित होता रहा है। कुछ माह पूर्व अतिरिक्त बजट का प्रावधान किए जाने के बाद अब निर्माण कार्य ने गति पकड़ी है। निर्धारित समय सीमा में इसे पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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