इस जेल में महात्मा गांधी ने बिताए थे दो दिन, अंधेरी कोठरियां देखकर कांप जाती है रूह (Video)

Edited By Ekta, Updated: 02 Oct, 2018 05:08 PM

हिमाचल की हसीन वादियों में आज भी एक ऐसी जेल स्थापित है जिसकी अंधेरी कोठरियां को देखकर लोगों की रूह कांप जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोलन के डगशाई में स्थित जेल की। सोलन के डगशाई में ब्रिटिश काल में अंग्रेजों द्वारा बनवाई गई यह जेल आज भी एक...

सोलन (चिनमय): हिमाचल की हसीन वादियों में आज भी एक ऐसी जेल स्थापित है जिसकी अंधेरी कोठरियां को देखकर लोगों की रूह कांप जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोलन के डगशाई में स्थित जेल की। सोलन के डगशाई में ब्रिटिश काल में अंग्रेजों द्वारा बनवाई गई यह जेल आज भी एक खौफनाक मंजर दर्शाती है। 
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दो दिन जेल में रहे थे गांधी जी
1920 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस जेल में 2 दिन बिताए थे। वह जेल में बंद आयरिश कैदियों से मिलने आए थे। आइरिश सैनिकों कि ब्रिटिश राज के विरुद्ध संघर्ष से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को भी प्रेरणा मिली थी। इस जेल का अंतिम कैदी महात्मा गांधी का हत्यारा नथुराम गोडसे था।
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जानकारी के अनुसार महात्मा गांधी के दौरे को लेकर अंग्रेजों ने उनके ठहरने के लिए छावनी क्षेत्र में इंतजाम किया था। लेकिन गांधी ने जेल में ही कैदियों संग ठहरने की बात कही थी, जिसे देखते हुए उन्हें वीआईपी सेल में ठहराया गया था।  
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आज भी जिस सेल में महात्मा गांधी ठहरे थे, वहां पर गांधी की एक तस्वीर, चरखा व एक गद्दा रखा गया है। आज भी हजारों की संख्या में लोग इस जेल को देखने के लिए आते हैं। देश के साथ ही एक संग्रहालय कक्ष बनाया गया है जिसमें जेल व डगशाई से जुड़ी स्मृतियां रखी गई है।
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अपने जेल म्यूजीयम की इस यात्रा में आप स्वतंत्रता से पहले वाले जमाने के इतिहास में चले जाएंगे, जहां आप करीब से जान सकते हैं कि उस जमाने में कैदियों को कितनी कठोर सजा और यातनाएं दी जाती थी। आपको यहां बता दें कि यहां पर कामागाटामारू के बागी सिख सैनिकों को भी रखा गया था और बाद में इन्हें फांसी दे दी गई थी। 
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कहां है डगशाई जेल
चंडीगढ़ से 40 किमी और सोलन जिले के कसौली से 11 किमी दूर कुमारहट्टी के पास यह जेल स्थित है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पहाड़ी पर बनी सेंट्रल जेल अंडेमान निकोबार की जेल की ही तरह है। यहां कई जाने-माने स्वतंत्रता सेनानियों को रखा गया था। यहां कैदियों के माथे पर गर्म सलाख से माथे पर दागा जाता था। इसे दाग-ए-शाही कहा जाता था। इसी वजह से इस स्थान को अब डगशाई कहा जाता है। इस जेल में उस समय बागी सिख सैनिकों को भी रखा गया था और बाद में इन्हें फांसी दे दी गई थी। डगशाई इलाके को 1847 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने स्थापित किया था। अंग्रेजों ने पटियाला के राजा से इस क्षेत्र के पांच गांवों को मिलाकर डगशाई की स्थापना की थी। 
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