Edited By Jyoti M, Updated: 23 Mar, 2026 03:58 PM

शिमला की वादियों का दीदार अब केवल घुमावदार सड़कों या टॉय ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। परवाणू से शिमला के बीच 38 किलोमीटर लंबा एक भव्य रोपवे बनने जा रहा है, जो न केवल भारत का सबसे लंबा रोपवे होगा, बल्कि सफर के रोमांच को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा। लगभग...
हिमाचल डेस्क। शिमला की वादियों का दीदार अब केवल घुमावदार सड़कों या टॉय ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। परवाणू से शिमला के बीच 38 किलोमीटर लंबा एक भव्य रोपवे बनने जा रहा है, जो न केवल भारत का सबसे लंबा रोपवे होगा, बल्कि सफर के रोमांच को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा। लगभग 6800 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का खाका तैयार हो चुका है।
निवेश को लुभाने के लिए नियमों में लचीलापन
इस बड़े प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए प्रदेश सरकार ने निजी कंपनियों की चिंताओं को समझते हुए टेंडर की शर्तों में दो बड़े बदलाव किए हैं। पहले कंपनी के लिए सालाना 10 लाख यात्रियों का लक्ष्य रखा गया था, जिसे अब घटाकर 8 लाख कर दिया गया है।
यात्रियों की संख्या 8 लाख से कम रहती है, तो सरकार कंपनी को होने वाले घाटे की भरपाई उसकी संचालन अवधि बढ़ाकर करेगी। यानी नुकसान वाले हर साल के बदले कंपनी को 4 महीने अतिरिक्त काम करने का समय दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएँ
यह प्रोजेक्ट 40 वर्षों के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलेगा। कंपनी अपनी मासिक कमाई का एक निश्चित हिस्सा राज्य सरकार को देगी। इस परियोजना को बनाने के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है। इस रोपवे के जरिए एक घंटे के भीतर 3000 से 5000 लोग यात्रा कर सकेंगे।
सफर के 8 पड़ाव: कहाँ-कहाँ रुकेंगे आप?
टाटा कंसल्टेंसी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, यह सफर 8 चरणों में बंटा होगा। इसके मुख्य स्टेशन इस प्रकार होंगे। परवाणू से जाबली और डगशाई, बड़ोग और सोलन शहर, करोल टिब्बा और वाकनाघाट (IT सिटी), शोघी और तारादेवी मंदिर क्षेत्र है।
कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे लाइन के बाद, यह रोपवे पर्यटकों के लिए राज्य का सबसे बड़ा आकर्षण बनने वाला है। इससे न केवल सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल सफर का विकल्प भी मिलेगा।