Edited By Jyoti M, Updated: 24 Mar, 2026 03:57 PM

प्रकृति का मिजाज कब बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है। किन्नौर के आसमान में सूरज चमक रहा था, लेकिन धरातल पर पहाड़ टूटकर बिखर रहे थे। यह एक ऐसी डरावनी तस्वीर थी जिसने कुछ ही पलों में रोंगटे खड़े कर दिए।
हिमाचल डेस्क। प्रकृति का मिजाज कब बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है। किन्नौर के आसमान में सूरज चमक रहा था, लेकिन धरातल पर पहाड़ टूटकर बिखर रहे थे। यह एक ऐसी डरावनी तस्वीर थी जिसने कुछ ही पलों में रोंगटे खड़े कर दिए।
आफत बनकर बरसीं चट्टानें
किन्नौर जिले के शोंगठोंग के पास नेशनल हाईवे-05 पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक पूरी पहाड़ी भरभरा कर सड़क पर आ गिरी। हैरानी की बात यह रही कि मौसम बिल्कुल साफ था, फिर भी अचानक हुए इस भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। मलबे की मार इतनी भीषण थी कि मजबूत पक्की सड़क पर करीब चार फीट का गहरा निशान (गड्ढा) बन गया।
सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
गनीमत रही कि वहां से गुजर रहे चालकों ने पत्थरों को गिरता देख समय रहते अपने वाहन रोक दिए। अगर गाड़ियां कुछ मीटर और आगे होतीं, तो परिणाम निगुलसेरी जैसी पुरानी दर्दनाक घटना की याद दिला देते। यात्रियों ने अपनी आंखों से मौत को सामने से गुजरते देखा, लेकिन वे सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे।
इस मलबे की वजह से नेशनल हाईवे पूरी तरह से कट गया। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों का लंबा जमावड़ा लग गया, जिससे यात्री घंटों फंसे रहे। बेबस लोग जान की परवाह किए बिना पैदल ही मलबे के ढेरों को पार करते नजर आए, जो किसी भी वक्त दोबारा पत्थर गिरने की स्थिति में जानलेवा साबित हो सकता था।
युद्ध स्तर पर बहाली का कार्य
मलबे की खबर मिलते ही विभाग की मशीनरी और कर्मचारी हरकत में आए। करीब तीन घंटे के कठिन ऑपरेशन के बाद सड़क को आंशिक रूप से खोला गया। फिलहाल प्रशासन ने एक तरफ से रास्ता साफ कर फंसी हुई गाड़ियों को निकालना शुरू कर दिया है।
प्रशासन की हिदायत
क्षेत्र की नाजुक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने चेतावनी जारी की है। यात्रियों से अपील की गई है कि पहाड़ी दरकते समय या पत्थर गिरते समय आगे बढ़ने की जल्दबाजी न करें।
खतरे वाले क्षेत्रों (Landslide Zones) में गाड़ी रोककर स्थिति का आकलन करें। साफ मौसम में भी चट्टानों के खिसकने का डर रहता है, इसलिए सफर के दौरान पूरी तरह चौकस रहें।