Himachal: 1905 के विनाशकारी भूकंप की बरसी से चंद घंटे पहले कांपी कांगड़ा की धरती, जानमाल का कोई नुक्सान नहीं

Edited By Vijay, Updated: 03 Apr, 2026 10:38 PM

earthquake in kangra

कांगड़ा जिला एक बार फिर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इन झटकों ने 121 वर्ष पूर्व आई उस भीषण त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब 4 अप्रैल 1905 को आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। एक अजीब संयोग के तहत 3 अप्रैल 2026 को आए ये हल्के झटके उस ऐतिहासिक...

पालमपुर (भृगु): कांगड़ा जिला एक बार फिर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इन झटकों ने 121 वर्ष पूर्व आई उस भीषण त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब 4 अप्रैल 1905 को आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। एक अजीब संयोग के तहत 3 अप्रैल 2026 को आए ये हल्के झटके उस ऐतिहासिक त्रासदी की बरसी से महज 8 घंटे 34 मिनट पहले महसूस किए गए। हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भूकंप की तीव्रता कितनी रही, लेकिन इससे एक बार फिर इतिहास की पुनरावृत्ति का अहसास हुआ है और लोगों में दहशत का माहौल है। फिलहाल अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार के जानमाल के नुक्सान की कोई सूचना नहीं मिली है।

विदित रहे कि 4 अप्रैल 1905 को सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरे कांगड़ा को तबाह कर दिया था। उस विनाशकारी भूकंप में लगभग 20 हजार लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। इस बार भले ही झटके हल्के रहे और किसी प्रकार की जानमाल की हानि नहीं हुई, लेकिन समय का यह संयोग लोगों को सोचने पर मजबूर कर गया है। चिंता का विषय यह भी है कि पिछले कुछ दिनों में कांगड़ा क्षेत्र में यह दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

संवेदनशील है कांगड़ा का भूगर्भीय क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र (सिस्मिक जोन 5) में आता है। हिमाचल प्रदेश का अधिकांश भाग उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां भूकंप की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप का सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।

प्रशासन की स्थिति पर पैनी नजर
इस संदर्भ में प्रशासन भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं। हालांकि इस बार किसी प्रकार का नुक्सान नहीं हुआ, लेकिन कांगड़ा की धरती का बार-बार कांपना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं, ऐसे में लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक और सजग रहने की आवश्यकता है।

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