नालागढ़ में बड़ा फर्जीवाड़ा! जीपीए और फर्जी एफिडैविट के सहारे बेच दी मृत व्यक्ति की जमीन

Edited By Vijay, Updated: 27 Mar, 2026 11:24 PM

deceased person s land sold using gpa and forged affidavits

सोलन जिला के उपमंडल नालागढ़ में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक कॉलोनाइजर द्वारा जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और फर्जी हलफनामों (एफिडैविट) का सहारा लेकर एक मृत व्यक्ति की जमीन को धड़ल्ले से बेच...

बीबीएन (शेर सिंह): सोलन जिला के उपमंडल नालागढ़ में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक कॉलोनाइजर द्वारा जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और फर्जी हलफनामों (एफिडैविट) का सहारा लेकर एक मृत व्यक्ति की जमीन को धड़ल्ले से बेच दिया गया। इस संगीन मामले का भंडाफोड़ होने के बाद शिकायतकर्ता ने डीजीपी सहित आला अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा सनेड़ गांव में विकसित की जा रही एक निजी कालोनी से जुड़ा हुआ है। मामले के शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने बताया कि इस कॉलोनी को विकसित करने वाले विक्रेता ने बद्दी तहसील के स्थानीय भूमि मालिकों से जमीन खरीदी थी और इसके एवज में उनसे जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) अपने नाम करवा ली थी। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, किसी भी जीपीए की वैधता तभी तक मानी जाती है, जब तक उसे देने वाला व्यक्ति (भूमि मालिक) जीवित हो।

इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि संबंधित भूमि मालिक की मृत्यु 22 अक्तूबर 2024 को हो चुकी थी। इसके बावजूद जीपीए होल्डर ने मृतक के नाम पर जमीन की दर्जनों रजिस्ट्रियां करवा डालीं। आरोप है कि हर नई रजिस्ट्री के दौरान जीपीए होल्डर द्वारा बाकायदा एक एफिडैविट (हलफनामा) दिया गया। इस हलफनामे में झूठी शपथ ली गई कि जीपीए देने वाला व्यक्ति अभी जीवित है और यह पावर ऑफ अटॉर्नी निरस्त नहीं की गई है। इन्ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया गया।

शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने केवल जमीन की धोखाधड़ी तक ही सीमित न रहते हुए कालोनी के विकास में भी भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस प्रोजैक्ट के लिए रेरा  से कोई भी अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई है। इसके अलावा, नगर व ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग की ओर से जो नक्शा मंजूर किया गया था, उसमें भी 3 साल बाद अवैध रूप से फेरबदल कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने के बाद से उन्हें लगातार गंभीर धमकियां मिल रही हैं।

आरोपी ने दी सफाई, पुलिस कर रही मामले की जांच
उधर, इस पूरे मामले पर जब जीपीए होल्डर नरिंद्र का पक्ष जाना गया, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। नरिंद्र ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने और उनके पार्टनर ने कोई भी गलत या गैर-कानूनी काम नहीं किया है। उनका दावा है कि कालोनी से जुड़ा हर काम नियमों के तहत और सभी आवश्यक अनुमतियां लेकर ही किया जा रहा है। मामले की पुष्टि करते हुए एएसपी बद्दी अशोक वर्मा ने बताया कि पुलिस को अनिल कुमार की तरफ से इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है।

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