Edited By Jyoti M, Updated: 28 Mar, 2026 03:16 PM

हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देते हुए जल्द ही सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सेट (दूरबीन तकनीक) की सुविधा मिलने जा रही है। इस तकनीक के आने से अब कैंसर के ट्यूमर निकालने के लिए मरीजों के शरीर...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देते हुए जल्द ही सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग को अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सेट (दूरबीन तकनीक) की सुविधा मिलने जा रही है। इस तकनीक के आने से अब कैंसर के ट्यूमर निकालने के लिए मरीजों के शरीर पर बड़े चीरे लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हाई-टेक उपकरणों की मदद से सर्जन शरीर के भीतर छिपे जटिल ट्यूमर को सूक्ष्म स्तर पर देख सकेंगे और सटीक ऑपरेशन कर पाएंगे। इसमें शामिल वेसल सीलर जैसी आधुनिक तकनीक से सर्जरी के दौरान खून का बहाव बेहद कम होगा, जिससे मरीजों को अलग से खून चढ़ाने की आवश्यकता भी कम पड़ेगी।
मरीजों के लिए राहत और कम समय में रिकवरी
इस नई सुविधा का सबसे बड़ा लाभ मरीजों की रिकवरी में दिखेगा। जहां पहले बड़े ऑपरेशनों के बाद मरीज को ठीक होने में करीब दो हफ्ते लगते थे, वहीं अब दूरबीन विधि से सर्जरी होने पर मरीज मात्र 4 से 5 दिनों में घर जा सकेंगे। छोटे कट होने के कारण दर्द कम होगा और संक्रमण (इंफेक्शन) का खतरा भी लगभग खत्म हो जाएगा। इसके अलावा, ऑपरेशन के दौरान स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाए बिना केवल कैंसर की गांठ को निकालना अधिक आसान हो जाएगा, जिससे इलाज की सफलता दर में बढ़ोतरी होगी।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी यह सुविधा
बिलासपुर के साथ-साथ हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और ऊना जैसे जिलों के हजारों कैंसर पीड़ितों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। अब मरीजों को महंगे इलाज के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली के बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। निजी अस्पतालों में लाखों में होने वाला यह इलाज अब एम्स में किफायती दरों पर उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक विशेष रूप से कैंसर की दूसरी और तीसरी स्टेज वाले मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।