Edited By Vijay, Updated: 16 Apr, 2026 07:31 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में मृदा एवं नमी संरक्षण और वर्षा जल संग्रहण के कार्यों को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए एक समान नीति तैयार करने का बड़ा निर्णय लिया है।
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में मृदा एवं नमी संरक्षण और वर्षा जल संग्रहण के कार्यों को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए एक समान नीति तैयार करने का बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने यह कदम हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में उठाया है। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस समिति की अध्यक्षता प्रधान मुख्य अरण्यपाल करेंगे। समिति में 13 अन्य महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें आपदा प्रबंधन, जनजातीय विकास, उद्योग, शहरी विकास, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, बागवानी, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के निदेशक प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, वन संरक्षक (अग्नि सुरक्षा एवं नियंत्रण) को इस समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
सरकार ने समिति को राज्य की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप एक व्यापक नीति तैयार करने का जिम्मा सौंपा है। समिति के मुख्य कार्यों में पिछले दो वर्षों में मृदा संरक्षण और जल संग्रहण पर हुए भौतिक एवं वित्तीय खर्चों का गहन विश्लेषण करना शामिल है। नीति का खाका तैयार करने के लिए राज्य के भूविज्ञान, भूगोल, जैव विविधता और जल विज्ञान को आधार माना जाएगा। इसके लिए आवश्यक वैज्ञानिक डाटा जुटाने हेतु सर्वेक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर समिति विषय विशेषज्ञों और अनुभवी संस्थानों की सेवाएं लेने के लिए भी स्वतंत्र होगी।
सरकार ने इस महत्वपूर्ण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। समिति को आगामी 2 महीने के भीतर मृदा नमी संरक्षण और वर्षा जल संग्रहण के लिए ओवरआर्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को सौंपना होगा। कार्य में पारदर्शिता और प्रगति की निगरानी के लिए समिति को अपनी रिपोर्ट हर 15 दिन में सरकार के समक्ष प्रस्तुत करनी अनिवार्य होगी।
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