हिमाचल में अब इन कर्मचारियों को भी मिलेंगे पदोन्नति के अवसर, 1972 के बाद लिया निर्णय

Edited By Kuldeep, Updated: 05 Apr, 2026 07:27 PM

shimla employees promotion opportunity

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के निदेशक मंडल की बैठक में कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

शिमला (अभिषेक): हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के निदेशक मंडल की बैठक में कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। हाल ही में हुई इस बैठक में एचपीटीडीसी के सफाई कर्मचारी व माली वर्ग के लिए पदोन्नति नियमों में संशोधन करते हुए उन्हें निगम में पदोन्नति के अवसर प्रदान किए गए हैं। यह निर्णय वर्ष 1972 के पश्चात पहली बार लिया गया है। यह निर्णय लिए जाने पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ ने इसका स्वागत किया है। संघ के महासचिव राजकुमार शर्मा ने कहा कि यह एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली की पहल से संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल इन वर्गों के कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें उनके कार्य के अनुरूप सम्मान भी प्रदान करेगा। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के यूटिलिटी वर्कर पद का नाम परिवर्तित कर मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) रखा गया है।

राजकुमार शर्मा ने कहा कि कर्मचारी हितों के संदर्भ में जीर्णोद्धाराधीन इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों को एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आरएस बाली द्वारा प्रदेश सरकार के समक्ष उठाने का निर्णय भी स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि हालांकि कर्मचारी संघ प्रदेश सरकार का ध्यान निगम की बढ़ती वित्तीय देनदारियों की ओर आकर्षित करना चाहता है। लंबे समय से लंबित डीए का एरियर, नए वेतनमान के एरियर तथा वेतन भुगतान में हो रही देरी कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि निगम के विभिन्न होटलों में प्रबंधकीय पदों की रिक्तियों के कारण कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है, जिन्हें शीघ्र भरना अत्यंत आवश्यक है।

एचपीटीडीसी के होटलों को ओएनएम आधार पर देने के निर्णय पर पुन: विचार करे सरकार
एचपीटीडीसी के कुछ होटलों को ऑप्रेशन एंड मैंटीनैंस (ओएनएम) के आधार पर देने के निर्णय पर प्रदेश सरकार से पुन: विचार करने का आग्रह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ ने किया है। राजकुमार शर्मा ने कहा कि निगम की परिसंपत्तियों को ओएनएम जैसी प्रक्रिया के अंतर्गत निजी हाथों में देने की बजाय निगम के माध्यम से ही संचालित किया जाए।

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