Himachal: भरमौर से आई सुखद खबर, कुगती की दुर्गम पहाड़ियों में कैमरे में कैद हुआ ये दुर्लभ वन्यजीव

Edited By Vijay, Updated: 15 Apr, 2026 01:09 PM

rare himalayan tahar captured on camera

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। सुप्रसिद्ध कुगती वन्यजीव अभ्यारण्य के धरोल क्षेत्र में एक दुर्लभ हिमालयन ताहर (नर) देखा गया है।

चम्बा (काकू चौहान): हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। सुप्रसिद्ध कुगती वन्यजीव अभ्यारण्य के धरोल क्षेत्र में एक दुर्लभ हिमालयन ताहर (नर) देखा गया है। यह शानदार वन्यजीव पहाड़ियों की दुर्गम और ऊंची चट्टानों पर विचरण करता पाया गया, जिसकी तस्वीरें और साइटिंग सोशल मीडिया तथा वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का संकेत
कुगती के धरोल क्षेत्र में हिमालयन ताहर की मौजूदगी को विशेषज्ञ इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों की श्रेणी में आने वाला यह जीव मुख्य रूप से ऊंचे हिमालयी इलाकों के उन हिस्सों में रहता है, जहां पहुंचना इंसानों के लिए अत्यंत कठिन होता है। इसकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि वन्यजीव विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण के प्रयास धरातल पर सफल हो रहे हैं।

पहले थनारी गोठ में दिखी थी मादा एल्बिनो हिमालयन ताहर
बता दें कि इससे पहले कुगती में एक अत्यंत दुर्लभ सफेद मादा एल्बिनो हिमालयन ताहर दिखाई दी थी। यह वन्य जीव धरौल बीट में स्थित थनारी गोठ में रिकॉर्ड किया गया था। वन्य जीवों की दुनिया में इस सफेद ताहर का दिखना एक असाधारण घटना मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयन ताहर की कुल आबादी में केवल 0.05 प्रतिशत में ही यह शुद्ध सफेद गुण पाया जाता है। यह जीव खड़ी चट्टानों और दुर्गम पहाड़ियों पर रहने के लिए जाना जाता है, जो आमतौर पर गहरे भूरे रंग का होता है। ​

डीएफओ वन्य प्राणी ने जारी किया जागरूकता संदेश
इस महत्वपूर्ण साइटिंग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डीएफओ वन्य प्राणी चम्बा,डॉक्टर कुलदीप जम्वाल ने एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि हिमालयन ताहर हमारे प्राकृतिक ईको-सिस्टम का एक अनमोल हिस्सा है। डॉक्टर जम्वाल के अनुसार इन दुर्लभ जीवों का संरक्षण केवल विभाग का काम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन्यजीव विभाग इस क्षेत्र में अब निगरानी और अधिक कड़ी करने जा रहा है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सख्त हिदायत
वन्यजीव विभाग ने लोगों और ट्रैकर्स से अपील की है कि यदि वे इन वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखते हैं, तो उनके करीब जाने या फोटो-वीडियो के चक्कर में उन्हें परेशान करने का प्रयास न करें। डॉक्टर जम्वाल ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के आवास में दखल देना उनके लिए मानसिक तनाव और असुरक्षा का कारण बनता है। नियमों का उल्लंघन करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।

शिकार और अवैध गतिविधियों पर रहेगी पैनी नजर
स्थानीय समुदायों की भूमिका की सराहना करते हुए विभाग ने उन्हें शिकार जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों से आह्वान किया कि वे विभाग की आंख और कान बनें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए इन जीवों का स्वतंत्र और सुरक्षित रहना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी हिमालय की इस प्राकृतिक विरासत को देख सकें।

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