Edited By Vijay, Updated: 17 Apr, 2026 11:13 PM

भारत में मार्शल आर्ट्स और कुश्ती के आधुनिक रूप ग्रैपलिंग को नई ऊंचाइयां देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद प्रो. सिकंदर कुमार को सर्वसम्मति से भारतीय ग्रैपलिंग संघ (जीएफआई) का नया चेयरमैन...
हमीरपुर (राजीव चौहान): भारत में मार्शल आर्ट्स और कुश्ती के आधुनिक रूप ग्रैपलिंग को नई ऊंचाइयां देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार को सर्वसम्मति से भारतीय ग्रैपलिंग संघ (जीएफआई) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। विशेष बातचीत में डॉ. सिकंदर कुमार ने बताया कि ग्रैपलिंग में ग्रामीण प्रतिभा को उभारा जाएगा और हर खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बल पर आगे आएगा। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में खेल अकादमियों की स्थापना और युवाओं को नशे से दूर कर खेलों की ओर मोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।
संघ के महासचिव सुबोध कुमार यादव ने जारी किया आधिकारिक पत्र
भारतीय ग्रैपलिंग संघ के महासचिव सुबोध कुमार यादव ने आधिकारिक पत्र जारी करते हुए डॉ. सिकंदर कुमार को इस सम्मानजनक और सलाहकार पद के लिए आमंत्रित किया है। प्रो. सिकंदर कुमार न केवल एक अनुभवी राजनेता हैं, बल्कि शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के खेल प्रेमियों ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है और बहुत से खेल संघों, सामाजिक संस्थाओं व देश की गण्यमान्य हस्तियों ने उन्हें बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
जानिए क्या है ग्रैपलिंग
गौरतलब है कि भारतीय ग्रैपलिंग संघ विश्व की सबसे बड़ी कुश्ती संस्था ‘यूनाइटेड वर्ल्ड रैसलिंग' से मान्यता प्राप्त है। चूंकि ग्रैपलिंग को भविष्य के संभावित ओलिंपिक खेलों के रूप में देखा जा रहा है, ऐसे में प्रो. सिकंदर कुमार का नेतृत्व भारत को वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा करने में सहायक होगा। संघ ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रो. सिकंदर कुमार का विशिष्ट सार्वजनिक जीवन और खेलों के प्रति उनका लगाव हमारे महासंघ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हमें विश्वास है कि उनका मार्गदर्शन न केवल खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ग्रैपलिंग के विस्तार में भी मील का पत्थर साबित होगा।
डॉ. सिकंदर ने खुद नहीं मांगा था टिकट
डॉ. सिकंदर राजनीति से आने से पहले शिक्षाविद् रहे हैं। उन्होंने (पीएचडी) डॉक्टरेट की डिग्री ली है। डाॉ. सिकंदर की अर्थशास्त्र यानी इकोनॉमिक्स में विशेषज्ञता है। वहीं एचपीयू में अर्थशास्त्र विभाग में प्रोफैसर रहे हैं। राज्यसभा सांसद बनने से पहले डॉ. सिकंदर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति थे। उन्होंने एचपीयू में लंबे समय तक अर्थशास्त्र पढ़ाया। डॉ. सिकंदर गरीब परिवार और अनुसूचित जाति से आते हैं। उन्होंने खुद बताया है कि संघर्ष करके पढ़ाई की और कुलपति तक पहुंचे। उन्होंने 19 मार्च, 2022 को कुलपति पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का नामांकन भरा था और 24 मार्च 2022 को निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए। डॉ. सिकंदर ने खुद टिकट नहीं मांगा था, पार्टी ने खुद तय करके उन्हें राज्यसभा भेजा था।
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