Edited By Kuldeep, Updated: 21 Apr, 2026 10:44 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि प्रातःकाल अखबार पढ़े बिना कोई गुजारा नहीं। अखबार की कुछ खबरें दिल दहला देती हैं। चिंता का विषय यह है कि ऐसी खबरें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
पालमपुर (भृगु): पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि प्रातःकाल अखबार पढ़े बिना कोई गुजारा नहीं। अखबार की कुछ खबरें दिल दहला देती हैं। चिंता का विषय यह है कि ऐसी खबरें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। इनमें सबसे अधिक चिन्ताजनक देश में होने वाली आत्महत्याएं हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष भारत में 1 लाख 87 हजार लोगों ने आत्महत्या की। इन में 13,000 छात्र थे। पिछले कुछ वर्षों से आत्महत्याएं प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही हैं। कुरुक्षेत्र में एक शिक्षा संस्थान में 2 महीने में 4 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक दुर्भाग्य का विषय यह है कि इन सब समस्याओं के मूल में जो समस्या है, उनकी ओर देश का ध्यान नहीं जा रहा है।
सबसे बड़ी समस्या प्रतिदिन दिन की तरह बढ़ती जनसंख्या है। उसी के कारण गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही है। युवा पीढ़ी में निराशा और हताशा का अंधेरा छा रहा है। शांता कुमार ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गरीबी और बेरोजगारी की समस्या के लिए बहुत बढ़िया योजनाएं बनीं। उनका लोगों को फायदा भी हुआ परन्तु उन योजनाओं की एक सीमा थी। सरकार ने रोजगार दिया परन्तु उस बीच बढ़ती जनसंख्या के कारण नए बेरोजगार खड़े हो गए।
दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देश चीन ने भी बढ़ती आबादी को रोका और आज भारत चीन को पीछे छोड़ कर सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। जरा ध्यान से सोचिए यदि भारत में बढ़ती आबादी को 100 करोड़ पर रोक लिया होता तो आज 44 करोड़ लोग कम होते और भारत खुशहाल होता और यह भयंकर महंगाई और बेरोजगारी न होती। उन्होंने कहा कि विश्व के 130 देशों में सबसे अधिक अमीर 5 देशों में भारत का नाम है परंतु विश्व में सबसे अधिक गरीब व भूखे लोग भी भारत में रहते हैं। भारत में विकास के साथ आर्थिक विषमता भी बढ़ती जा रही है। भारत एक अमीर देश है, जिसमें विश्व में सबसे अधिक गरीब रहते हैं।