हिमाचल की पाकिस्तान से तुलना पर मंत्री जगत नेगी ने जताई आपत्ति, बोले-दोहरा मापदंड अपना रहे जयराम ठाकुर

Edited By Jyoti M, Updated: 08 Apr, 2026 07:53 PM

opposition leader jairam thakur

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए प्रदेशभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष की लगभग 65 हजार किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 21...

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर द्वारा दिए गए बयान को इसे विरोधाभासी और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। जयराम ठाकुर ने कहा था कि प्रदेश में पाकिस्तान जैसे हालात हो गए हैं। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में एक सवाल के जवाब में जगत सिंह नेगी ने कहा कि जयराम ठाकुर हर विषय के विशेषज्ञ बनने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी हर बात को गंभीरता से लेना जरूरी नहीं है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब जयराम ठाकुर स्वयं मुख्यमंत्री थे, तब क्या प्रदेश की स्थिति बेहतर थी, और अब वह हिमाचल की तुलना पाकिस्तान से कर रहे हैं। नेगी ने कहा कि एक ओर भाजपा नेता पाकिस्तान को कोसते हैं, वहीं दूसरी ओर हिमाचल की तुलना उसी देश से करना उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है। नेगी ने आगे कहा कि यह समझ से परे है कि आखिर इस तरह की तुलना करने के पीछे क्या कारण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का हिस्सा है और देश सर्वोपरि है। ऐसे में प्रदेश की छवि को नुक्सान पहुंचाने वाले बयान देना उचित नहीं है।

प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर नेगी ने पूर्व भाजपा सरकार और तथाकथित डबल इंजन व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार प्रदेश को भारी कर्ज के बोझ तले छोड़कर गई है। लगभग एक लाख करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर डाला गया, जिसमें 75 हजार करोड़ रुपए का कर्ज शामिल है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने केंद्र से मिले संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में विफल रही। कांग्रेस नेता के बयान पर उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी के मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए।

आरडीजी बंद करने का जवाब न तो केंद्र सरकार और न ही जयराम के पास
जगत सिंह नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) को बंद कर दी गई, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति और अधिक प्रभावित हुई है। यह हिमाचल का संवैधानिक अधिकार है, जिसे बिना स्पष्ट कारण के समाप्त कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आरडीजी क्यों बंद की गई, इसका जवाब न तो केंद्र सरकार दे रही है और न ही जयराम ठाकुर के पास इसका कोई उत्तर है।

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