Edited By Vijay, Updated: 01 Apr, 2026 05:44 PM

हिमाचल प्रदेश में दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों को अब पैंशन नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पैंशन से संबंधित संशोधन विधेयक, 2026 को पेश किया।
शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश में दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों को अब पैंशन नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पैंशन से संबंधित संशोधन विधेयक, 2026 को पेश किया। इस विधेयक के पारित होने और उसके बाद राज्यपाल से स्वीकृति मिलने के बाद इसके ऊपर अमल होगा। इसके उद्देश्यों के अनुसार संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों के पैंशन के मामले में यह संशोधन प्रभावी होगा। ऐसा करके राज्य सरकार दल-बदल को हतोत्साहित करना चाहती है, ताकि जनादेश की रक्षा के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को कानून का संरक्षण मिल सके।
वर्तमान में प्रदेश की 14वीं विधानसभा है। वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ कांग्रेस के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, इस कारण भाजपा के हर्ष महाजन सांसद चुने गए थे। इस संशोधन पर अमल के बाद अयोग्य घोषित विधायक चैतन्य शर्मा व देवेंद्र भुट्टो पैंशन के हकदार नहीं होंगे। इसके अलावा उस समय क्रॉस वोटिंग करने वाले सदस्य 1 से अधिक बार विधायक बन चुके हैं, जिस कारण उनको उस अवधि का पैंशन व भत्तों संबंधी लाभ मिलता रहेगा। इनमें से विधायक सुधीर शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल व आशीष शर्मा उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इसके अलावा होशियार सिंह, रवि ठाकुर, केएल ठाकुर और राजेंद्र राणा पहले विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
जुर्माने व फीस बढ़ौतरी संबंधी विधेयक पारित
शिमला की प्रतिबंधित व बंधित सड़कों पर जुर्माने व फीस बढ़ौतरी संबंधी विधेयक सदन से ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके अनुसार अब बिना परमिट के वाहन चलाने पर 5000 रुपए से लेकर 10,000 रुपए जुर्माना होगा। इसी तरह आवेदन शुल्क और परमिट फीस में भी बढ़ौतरी का प्रस्ताव है।
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