Edited By Vijay, Updated: 23 Jun, 2026 07:47 PM

हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों-बागवानों की आर्थिकी को नई उड़ान देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अहम कदम उठाए हैं।
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों-बागवानों की आर्थिकी को नई उड़ान देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अहम कदम उठाए हैं। जनजातीय विकास और बागवानी विभागों की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार रसायनमुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी का सबसे अहम योगदान है। किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने और कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए सरकार बागवानी विभाग को हरसंभव सहयोग देगी। विभाग के सुचारू कामकाज के लिए बागवानी विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा। एचपी-शिवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए सीएम ने निर्देश दिए कि अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार फलों की विभिन्न किस्मों को उगाने की नितांत आवश्यकता है। धिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बागवानों को समय-समय पर व्यापक तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध करवाएं।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय विकास विभाग की योजनाओं की गति की भी बारीकी से समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को विकास योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। बैठक में निचार, पांगी, भरमौर और लाहौल में चल रहे एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के कामकाज का भी ब्यौरा लिया गया। वर्तमान में इन स्कूलों में 1013 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य के इन होनहारों को पढ़ाई के लिए सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इस उच्च स्तरीय बैठक में बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, सचिव सी. पालरासू सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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