Shimla: क्रिप्टो करंसी स्कैम : हवा में बेचे फर्जी 'सिक्के', जमीनों पर खड़ी कीं बेनामी संपत्तिया

Edited By Kuldeep, Updated: 16 Jun, 2026 06:08 PM

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में 500 करोड़ रुपए से अधिक के क्रिप्टो करंसी स्कैम के राज धीरे-धीरे खुलते जा रहे हैं।

शिमला (राक्टा): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में 500 करोड़ रुपए से अधिक के क्रिप्टो करंसी स्कैम के राज धीरे-धीरे खुलते जा रहे हैं। खुलासा हुआ है कि शातिर आरोपियों ने हिमाचल और पंजाब में 2.5 लाख से अधिक निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूट कर कई बेनामी संपत्तियां खड़ी कीं। ऐसे में अब जांच की आंच रियल एस्टेट और बेनामी संपत्तियों तक पहुंच गई है। अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ इंटरनैट के पर्दे के पीछे खेला गया वर्चुअल फर्जीवाड़ा नहीं था, बल्कि 'हवा' (आभासी दुनिया) में बेचे गए फर्जी 'कोर्वियो कॉइन' (केआरओ) की काली कमाई से जमीन पर करोड़ों की अचल संपत्तियों का साम्राज्य खड़ा किया जा रहा था। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा सुभाष शर्मा भले ही दुबई फरार हो गया हो, लेकिन उसकी काली कमाई को 'सफेद' करने का ठेका कई सिंडिकेट ने ले रखा था।

ईडी जांच में सामने आया है कि मासूम और विजय जुनेजा का भी नैटवर्क के कहीं न कहीं अहम मोहरे थे। सुभाष शर्मा और उसके सहयोगियों हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक और राधिका द्वारा निवेशकों से जो पैसा हड़पा जाता था, उसका कुछ हिस्सा सीधे कैश के रूप में इन दोनों तक पहुंचता था। जांच में खुलासा हुआ है कि इस काली कमाई (कैश) का इस्तेमाल बेहद शातिर तरीके से महंगी अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। जालसाजों की काम करने की शैली यह थी कि कागजों पर संपत्तियों की कीमत बहुत कम दिखाई जाती थी, जबकि असल कीमत का एक बड़ा हिस्सा नकद चुकाया जाता था।

ऐसे में ईडी अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि इस घोटाले का कुल कितना पैसा रियल एस्टेट बाजार और संपत्तियों में खपाया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ संपत्तियों को जब्त भी किया जा सकता है। इस मामले में कई चेहरे ईडी के राडार पर हैं। पंजाब और हिमाचल में आरोपियों ने मुख्य रूप से ठगी को अंजाम दिया, जबकि काली कमाई के खेल का नैटवर्क कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है। ऐसे में जांच एजैंसी पूरे मामले की परतें उधेड़ने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं, साथ ही मुख्य आरोपी को स्वदेश लाने के प्रयास भी तेज हो गए हैं।

कर्मचारियों के खाते, अपने हाथ में रिमोट कंट्रोल
जांच एजैंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए शातिरों ने जालसाजी की सारी हदें पार कर दीं। आरोपियों ने अपने ही दफ्तर के कर्मचारियों के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खुलवाए। हालांकि खातों का असली रिमोट कंट्रोल आरोपियों के पास ही था। इससे निवेशकों का पैसा सीधे संबंधित खातों में ट्रांसफर कर घुमाया जाता था, ताकि पुलिस या ईडी को भनक न लगे।

सर्वर विदेशी, शिकार स्वदेशी
वर्ष 2018 में शुरू हुई इस एमएलएम पोंजी स्कीम को बेहद शातिर और पेशेवर तरीके से डिजाइन किया गया था। जब जालसाजों को लगा कि भारतीय सर्वर पर रहने से वे कानून के शिकंजे में आ सकते हैं तो उन्होंने रातों-रात अपना पूरा सिस्टम 'डिजिटल ओसियन' जैसे विदेशी सर्वर पर शिफ्ट कर दिया। इसके बाद कोरवियो डॉट आईओ और वोस्क्रो डॉट कॉम जैसे डोमेन बनाकर भोले-भाले लोगों को भारी मुनाफे और ऊंचे रिटर्न का लालच दिया गया।

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