Edited By Kuldeep, Updated: 02 Apr, 2026 09:59 PM

विधानसभा का बजट सत्र इस बार 2 चरणों में हुआ, जिसमें मुद्दों को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला।
शिमला (कुलदीप शर्मा): विधानसभा का बजट सत्र इस बार 2 चरणों में हुआ, जिसमें मुद्दों को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। पहले चरण में 3 बैठकों के दौरान राज्यपाल का अभिभाषण व राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बहाली संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। इस बार राज्यपाल ने भी अपने अभिभाषण को पूरा नहीं पढ़ा तथा चंद मिनट में इसको समाप्त करके वापस चले गए। इसके बाद आर.डी.जी. के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में सीधे टकराव देखने को मिला, जिसमें दोनों पक्षों ने राज्य की मौजूदा वित्तीय हालत का ठीकरा एक-दूसरे के सिर पर मढ़ने का प्रयास किया। बजट सत्र के दूसरे चरण में 13 बैठकें हुईं, जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिकूल वित्तीय हालात में लगातार चौथा बजट पेश किया। उन्होंने वित्तीय वर्ष, 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के बजट आकार से 3,586 करोड़ रुपए का आकार कम रहा।
यानी आरडीजी बंद होने का असर सीधे तौर पर बजट पर पड़ा। सरकार को वित्तीय अनुशासन पर चलने के लिए बाध्य होना पड़ा, जिसके चलते माननीय से लेकर अफसरों के वेतन में 6 माह तक अस्थायी कटौती की गई। इसके लिए मुख्यमंत्री की तरफ से तर्क दिया गया कि ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि प्रदेश की आर्थिकी पटरी पर आ सके। हालांकि राज्य पर 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए कर्ज चढ़ने के बाद आर्थिकी को पटरी पर लाना इस समय राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसी कारण सरकार बजट में न तो कर्मचारियों की लंबित वित्तीय अदायगियों और महंगाई भत्ता देने पर कोई घोषणा कर पाई।
3 महत्वपूर्ण विधेयक पारित
दल बदल करके अयोग्य घोषित विधायकों की पैंशन को रोकने, किसान आयोग का गठन करने एवं पंचायती राज संस्थाओं में चिट्टा और हैरोइन की तस्करी में संलिप्त लोगों के चुनाव लड़ने से संबंधित महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित हुए। इसमें दल बदल करके अयोग्य घोषित विधायकों के लाभ पिछले समय से समाप्त करने पर विपक्ष ने जरूर आपत्ति जताई, लेकिन 2 अन्य संशोधनों पर सरकार को सहयोग मिला।
मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष व अध्यक्ष की टिप्पणियों ने सुर्खियां बटोरीं
सदन में कई मौके ऐसे आए जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने नजर आए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष को ब्लड प्रैशर की दवा खाने और गुस्सा नहीं करने की हिदायत दी तथा भाजपा पर हिमाचल के हितों को बेचने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज किया तथा कहा कि विपक्ष तो खरी-खोटी सुनाएगा तथा सत्ता पक्ष को इसे सुनने की आदत डालनी पड़ेगी। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी अपनी टिप्पणियों से सदन का ध्यान आकर्षित किया तथा पक्ष और विपक्ष को बेहतर तरीके से संभालकर कार्यवाही में गतिरोध नहीं पड़ने दिया।
कमलेश ठाकुर की सदन में सक्रियता
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी एवं देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर की सदन में सक्रियता नजर आई। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विषयों को न केवल प्रश्नकाल बल्कि अन्य नियमों के तहत भी उठाया। उन्होंने विपक्ष की तरफ से सरकार पर की जाने वाली टिप्पणियों को भी सकारात्मक तरीके से लेने की बात कही।