दोस्तों के साथ हिमाचल घूमने आया दिल्ली का युवक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता, पुलिस ने छेड़ा सर्च अभियान

Edited By Vijay, Updated: 14 May, 2026 06:59 PM

delhi youth goes missing under suspicious circumstances

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी एक बार फिर रहस्यमयी गुमशुदगी को लेकर चर्चा में है। मलाणा क्षेत्र में छुट्टियां मनाने आया दिल्ली का एक 24 वर्षीय पर्यटक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है।

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी एक बार फिर रहस्यमयी गुमशुदगी को लेकर चर्चा में है। मलाणा क्षेत्र में छुट्टियां मनाने आया दिल्ली का एक 24 वर्षीय पर्यटक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। मणिकर्ण पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर युवक की तलाश शुरू कर दी है।

लापता पर्यटक की पहचान मोहित चौधरी (24) पुत्र कमल सिंह, निवासी सदर बाजार (दिल्ली) के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मोहित 7 मई को अपने दोस्तों के साथ मलाणा घूमने आया था। 10 मई को यह पूरा ग्रुप मलाणा के पास स्थित वाइचिन घाटी के एक कैफे में ठहरा हुआ था। मोहित ने दोस्तों से कहा कि वह बाहर से अपना कुछ सामान लेने जा रहा है। घंटों बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो दोस्तों ने उसकी तलाश शुरू की। फोन पर संपर्क किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। अपने स्तर पर सारी कोशिशें नाकाम होने के बाद दोस्तों ने मणिकर्ण पुलिस को घटना की सूचना दी।

एसपी कुल्लू मदन लाल कौशल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस टीमें लापता पर्यटक को खोजने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं। इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों से विशेष अपील की है कि वे बिना पेशेवर गाइड या उचित पंजीकरण के अनजान जंगली इलाकों और ट्रैकिंग रूट्स पर जाने से बचें।

पार्वती घाटी में 20 साल में 1078 लोग लापता, 498 का चला पता
पार्वती घाटी में पर्यटकों के गायब होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। वर्ष 2003 से 2023 के बीच पार्वती घाटी से 1078 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें से केवल 498 लोगों का ही पता चल पाया है, जबकि बाकी 580 लोगों का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। विदेशी नागरिक भी इस घाटी के रहस्यमयी रास्तों से अछूते नहीं हैं। 1991 से लेकर अब तक कुल्लू जिले से 19 विदेशी नागरिक लापता हो चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ओडेट विक्टोरिया (1991), पोलिश नागरिक ब्रूनो मुशालिक (2015) और अमेरिकी नागरिक जस्टिन अलेक्जेंडर शेटलर (2016) जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें आज तक खोजा नहीं जा सका है।

आखिर क्यों होते हैं हादसे?
प्रशासन के अनुसार इस इलाके में अधिकांश मौतें और गुमशुदगी की घटनाएं लापरवाही के कारण होती हैं। पर्यटक अक्सर रोमांच की तलाश में बिना किसी पेशेवर गाइड के तय रास्तों से भटक जाते हैं। इसके बाद वे या तो घने जंगलों में खो जाते हैं, गहरी खाइयों में गिर जाते हैं, या फिर अचानक नदी के तेज बहाव में बह जाते हैं।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!