अब महंगी और दोहरी सर्जरी से मिलेगी राहत, अंडे के छिलकों से जुड़ेंगी टूटी हुई हड्डी; NIT हमीरपुर के छात्रों ने खोजा नया इलाज

Edited By Swati Sharma, Updated: 13 Apr, 2026 12:41 PM

a feat by nit hamirpur students broken bones to be mended using eggshells

Hamirpur News : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर के छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कमाल कर दिया है। दरअसल, संस्थान के मैटीरियल साइंस विभाग के विद्यार्थियों ने अंडे के छिलकों और जैविक तत्वों का उपयोग कर एक ऐसा...

Hamirpur News : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर के छात्रों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कमाल कर दिया है। दरअसल, संस्थान के मैटीरियल साइंस विभाग के विद्यार्थियों ने अंडे के छिलकों और जैविक तत्वों का उपयोग कर एक ऐसा 'बॉयोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड' (जैविक रॉड) तैयार किया है, जो फ्रैक्चर वाली हड्डी को जोड़ने में मदद करने के बाद शरीर के भीतर ही स्वतः घुल जाएगा। इस तकनीक के आने से मरीजों को रॉड निकलवाने के लिए होने वाली दूसरी महंगी और दर्दनाक सर्जरी से छुटकारा मिल सकेगा।

अंडे के छिलके कैसे बनेंगे हड्डी का सहारा?

डॉ. विक्रम वर्मा के निर्देशन में छात्र सक्षम, कृष, तनिष्क और प्रकृति ने इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है। इसकी निर्माण प्रक्रिया काफी वैज्ञानिक और रोचक है। छात्रों ने अंडे के छिलकों से कैल्शियम कार्बोनेट निकालकर उसका ऑर्थोफॉस्फोरिक एसिड के साथ रिएक्शन कराया, जिससे 'हाइड्रॉक्सीएपेटाइट' प्राप्त हुआ। यह तत्व मानव हड्डियों का मुख्य घटक होता है। इसके बाद इसे जिलेटिन और काइटोसैन से बने बायोपॉलिमर मैट्रिक्स के साथ मिलाकर माइनस 55 डिग्री सेल्सियस पर प्रोसेस किया गया। वहीं, तैयार स्कैफोल्ड हड्डी के भीतर प्राकृतिक संरचना की तरह काम करता है और हड्डी जुड़ने के बाद शरीर में अवशोषित हो जाता है। छात्रों के अनुसार, यह स्कैफोल्ड पूरी तरह सुरक्षित है।

पारंपरिक टाइटेनियम रॉड बनाम नया स्कैफोल्ड

वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली टाइटेनियम रॉड और इस नए नवाचार के बीच एक बड़ा तुलनात्मक अंतर है, जो मरीजों के लिए किफायती और सुरक्षित है।

मौजूदा टाइटेनियम रॉड:

कीमत: लगभग ₹15,000
कुल खर्च (दो सर्जरी): ₹1–2 लाख
रॉड निकालने के लिए दूसरी सर्जरी जरूरी

नया बॉयोडिग्रेडेबल स्कैफोल्ड:

अनुमानित कीमत: ₹4,000–₹5,000
दूसरी सर्जरी की जरूरत नहीं
कम दर्द और कम जोखिम

क्या हैं फायदे?

  • शरीर में खुद घुल जाने वाली संरचना
  • हड्डी जैसी जैविक संरचना
  • इलाज में कम खर्च
  • मरीज को कम दर्द और जोखिम

समाज और उद्योग के लिए लाभ

संस्थान की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना नानोटी ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि छात्रों के इस नवाचार को उद्योग के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके। फिलहाल इस मॉडल को संस्थान के टेकफेस्ट 'निंबस' में प्रदर्शित किया गया है, जहां विशेषज्ञों ने इसे भविष्य की सस्ती स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

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