Edited By Vijay, Updated: 04 Apr, 2026 05:28 PM

हिमाचल प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और 102 एम्बुलैंस सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर राज्य स्तरीय एम्बुलैंस काॅन्ट्रैक्ट यूनियन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 5 अप्रैल रविवार की शाम...
शिमला: हिमाचल प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और 102 एम्बुलैंस सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर राज्य स्तरीय एम्बुलैंस काॅन्ट्रैक्ट यूनियन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 5 अप्रैल रविवार की शाम 8 बजे से प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। इस हड़ताल से राज्यभर में एमरजैंसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। यूनियन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह हड़ताल 5 अप्रैल शाम 8 बजे से शुरू होगी और 11 अप्रैल सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। लगभग एक सप्ताह तक चलने वाली इस हड़ताल के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और रैफरल सेवाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों हो रही है हड़ताल?
एम्बुलैंस काॅन्ट्रैक्ट यूनियन के अध्यक्ष सुनील दत्त व महासचिव बालक राम ने बताया कि यह निर्णय मजबूरी में लिया गया है। कंपनी द्वारा लगभग 50 कर्मचारियों को बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से निकाल दिया गया है। लंबे समय से कर्मचारियों के वेतन में चली आ रहीं विसंगतियों को दूर नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर मानसिक और प्रशासनिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। यूनियन का दावा है कि उन्होंने नियमानुसार 14 दिन पहले ही सरकार और प्रबंधन को हड़ताल का नोटिस दे दिया था। इसके बावजूद अब तक न तो सरकार की ओर से और न ही संबंधित कंपनी की ओर से बातचीत की कोई पहल की गई है। यूनियन का कहना है कि उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिस कारण उन्हें काम बंद करने का कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है।
मरीजों पर पड़ेगा भारी असर
पूर्व के अनुभवों को देखें तो एम्बुलैंस कर्मियों की हड़ताल के दौरान मरीजों को निजी वाहनों या अन्य सरकारी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है, जो अक्सर समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं। विशेषकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में 108 सेवा ही जीवनरेखा है। ऐसे में 5 अप्रैल की शाम 8 बजे से होने वाली यह हड़ताल आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार समय रहते हस्तक्षेप कर इस संकट को टाल पाती है या प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे रहेंगी।
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